मशहूर शायर डा. राहत इंदौरी का निधन – मैं मर जाऊं , लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना।

-पत्रिका संवाददाता 
दिल्ली। यह शायरी है मशहूर शायर डा. राहत इंदौरी की, जिनका आज कोरोना ने निगल लिया। जाने माने शायर और गीतकार राहत इंदौरी का निधन हो गया है। वो कोरोना वायरस संक्रमित होने के बाद इंदौर के एक अस्पताल में भर्ती थे।
 70 वर्षीय राहत इंदौरी को कोरोना की वजह से सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।

इंदौर के श्री ऑरविंदो अस्पताल के अुनासार 11 अगस्त को दो बार दिल का दौरा पड़ा था। उनपर कोरोना वायरस संक्रमण का भी असर था। उन्हें डाक्टर बचाने में आसफल रहे। 9 अगस्त को वे कोरोना पॉज़िटिव पाए गए थे और उन्हें 60 प्रतिशत निमोनिया था।
गंभीर बीमारी की हालत में उन्होंने मंगलवार की सुबह ही खुद ट्वीट कर अपने संक्रमित होने की जानकारी दी थी।
उन्होंने लिखा था, “कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. ऑरविंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूं, दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं.”
उनका जन्म एक जनवरी, 1950 को हुआ था।
उनकी शायरी के युवा दीवाने थे। कुछ शायरी का नमूना देखिए—
सुला चुकी थी ये दुनिया थपक थपक के मुझे
जगा दिया तेरी पाज़ेब ने खनक के मुझे
अभी तो कोई तरक़्की नहीं कर सके हम लोग
वही किराए का टूटा हुआ मकां है मिया
राहत इंदौरी की मौत का करण दिल भी बना। उन्होंने दिल पर कई शयरी की। एक है—
 कोई बताये के मैं इसका क्या इलाज करूँ

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे
परेशां करता है ये दिल धड़क धड़क के मुझे।
  

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