डीयू के छात्रों का भविष्य खतरे में

-ऋषभ दुआ

दिल्ली विश्वविद्यालय के हज़ारों छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है क्योंकि डीयू के शिक्षक हड़ताल ले चलते, कॉपियां चेक नहीं कर रहे हैं। शिक्षकों की मांग है कि विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे लगभग 60 प्रतिशत एडहॉक शिक्षकों को नियमित किया जाए। डिपार्टमेंट वाइज़ रोस्टर बनाने के आदेश को वापस लिया जाए। डीयू को स्वायत्त नहीं किया जाए। ऐसे में हज़ारों छात्रों को एमए, एमबीए जैसे कोर्सों और दूसरे विश्वविद्यालयों में दाख़िला लेने में समस्या आ रही है।

17 तारीख से बच्चों के पोस्ट ग्रेजुएशन के एन्ट्रेंस टेस्ट शुरू हैं, लेकिन शिक्षकों की हड़ताल के चलते तब तक रिज़ल्ट ही नहीं आ पाएगा। मैनेजमेंट और शिक्षकों के बीच की लड़ाई में छात्रों का भविष्य ख़तरे में पड़ गया है। मूल्यांकन न होने से डीयू के लगभग 1.5 लाख छात्र प्रभावित हैं पर सबसे ज़्यादा असर फ़ाइनल इयर के लगभग 50000 छात्रों पर पड़ेगा, जिन्हें आगे पढ़ने के लिए दूसरे विश्वविद्यालयों में जाना है। वहीं दूसरी तरफ़ बाकी छात्रों को सत्र देरी से शुरू होने का डर सता रहा है।

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