Monday, May 27, 2024
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अभियान के पहले सप्ताह खोजे गए 11 टीबी रोगी, उपचार शुरू

फिरोजाबाद । सरकार का वर्ष 2025 तक देश को क्षय रोग मुक्त बनाने का प्रयास लगातार जारी है। इसी क्रम में क्षय रोग विभाग द्वारा 15 मई से 21 कार्य दिवसों में हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) के माध्यम से टीबी रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के पहले सप्ताह में 11 टीबी रोगी चिन्हित किए गए हैं जिनका नोटिफिकेशन कर उपचार शुरू किया गया है।
सीएमओ डॉ नरेंद्र सिंह ने बताया कि यह अभियान हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) के माध्यम से आयोजित किया गया है जिससे दूरदराज के टीबी संभावित लक्षण वाले लोग नजदीकी हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर द्वारा आयोजित कैंप के माध्यम से अपनी जांच करा सकेंगे। कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर (सीएचओ) के माध्यम से जांच के बाद टीबी रोगियों का उपचार शीघ्र शुरू कराया जा सके। उन्होंने कहा कि टीबी की यदि समय से जांच और उपचार हो जाए तो इस बीमारी की कड़ी को तोड़ा जा सकता है।
डीटीओ डॉ ब्रजमोहन ने कहा कि 15 मई से शुरू हुए इस अभियान में आशा कार्यकर्ता तथा एएनएम द्वारा घर-घर जाकर क्षय रोगियों की खोज की जा रही है जिनमें 50 से अधिक टीबी संभावित लक्षण वाले लोगों की सेंटरों पर बुलाकर स्क्रीनिंग की गई जिनमें 11 लोग पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने बताया कि इस अभियान में सीएचओ की भूमिका महत्वपूर्ण होने के नाते टीबी मरीजों का शीघ्र ही नोटिफिकेशन कर उपचार शुरू किया गया है।
जिला कार्यक्रम समन्वयक आस्था तोमर ने बताया कि यह विशेष अभियान 21 कार्य दिवसों तक चलाया जाएगा। एचडब्ल्यूसी के माध्यम से शिविर लगाकर टीबी संभावित लक्षण वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। शिविर लगाकर जन समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता फैलाई जा रही है जिनमें (टीबी के लक्षण, प्रकार, रोकथाम और इससे बचाव) की जानकारी दी जा रही है।
डीपीपीएमसी मनीष यादव ने बताया कि टीबी मरीजों की यदि समय से जांच तथा उपचार हो जाए तो निश्चय ही इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी की जांच व उपचार निशुल्क है साथ ही टीबी रोगी को निक्षय पोषण योजना के तहत ₹500 की राशि प्रतिमाह उपचार जारी रहने तक डीबीटी के माध्यम से खाते में स्थानांतरित की जाती है।
लाभार्थी शमशेर 47 निवासी नगला चुरा (काल्पनिक) ने बताया कि पिछले एक महीने से खांसी और पेट में दर्द तथा बुखार की शिकायत थी। मेडिकल स्टोर से स्वयं ही दवाई लेकर खा लेते थे लेकिन कोई आराम नहीं मिला। एक दिन खेत से लौटते समय आशा की मुलाकात शमशेर से हो गई तो उन्होंने अपनी समस्या के बारे में बताया। एचडब्ल्यूसी पर बुलाकर उनकी स्क्रीनिंग करावाई, जांच के लिए बलगम का नमूना भेजा। बाद में रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नोटिफिकेशन कर उनका उपचार शुरू हो गया है। डॉक्टर ने लगातार दवा खाने और पौष्टिक आहार खाने के लिए कहा है। शमशेर ने बताया कि उनके घर में किसी को टीबी की बीमारी कभी हुई नहीं थी इसलिए उनको संभावित लक्षणों के बारे में जानकारी नहीं थी।

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