रेलवे ट्रैक किनारे से जल्द हटेंगी झुग्गियां क्या है दिल्ली विधान सभा चुनाव का साइड इफेक्ट है ?

अपनी पत्रिका ब्यूरो-
दिल्ली।  दिल्ली में रेलवे ट्रैक और उसके आसपास फैली गंदगी को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के तेवर और रेल मंत्रालय द्वारा रेलवे के सेफ्टी ज़ोन में आनी वाले झुग्गियों को हटाने के प्रयाश क्या दिल्ली विधान सभा चुनाव का इम्पेक्ट है ? दिल्ली में आने वाले दिनों में क्या यह के बड़ा मुद्दा होगा ? रेलवे किनारे बसी झुग्गियों यानी अत्रिक्रमण हटाने के लिए किये जा रहे कथित प्रयासों के यह मतलब भी निकाले जा रहे है। रेलवे अधिकारी काफी सतर्क दिख रहे है। उत्तर रेलवे के महप्रबंधक एके पूठिया द्वारा अभी हाल ही में नई दिल्ली से आज़ाद पुर तक निरिक्षण दौरे को इसी नज़र से देखा जा रहा है।
दरअसल दिल्ली में रेलवे ट्रैक किनारे रेलवे की भूमि पर  बसी 47 हज़ार से ज्यादा झुग्गियां जहाँ एनजीटी के लिए चिंता है वहीं  रेलवे और यात्रियों की सुरक्षा और संचालन में सबसे बड़ी समस्या है। इनके रहते रेलवे ट्रैक पर गन्दगी होने से रोकना मुश्किल है।  लिहाज़ा रेलवे ने  दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस की मदद से अतिक्रमण रोकने का फैसला किया है। सबसे पहले सेफ्टी ज़ोन में आने वाले करीब 25 हज़ार प्राथमिकता पर है। ये झुग्गियां रेलवे ट्रैक के 15 मीटर के दायरे में आती है। रेलवे का मानना है की यही झुग्गियां न केवल हादसों की वजह है बल्कि रेल की रफ़्तार  पर भी ब्रेक लगती है।
हजारों वर्गमीटर भूमि पर है अतिक्रमण
दिल्ली मंडल में रेलवे की लगभग 60 हजार वर्गमीटर भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। दिल्ली के संजय कॉलोनी, जखीरा, दयाबस्ती, सुखदेव विहार, चंद्रशेखर आजाद कॉलोनी आदि इलाके में बहुत खराब हालात हैं। इसी तरह से शाहदरा तथा अन्य इलाके में भी अतिक्रमण की स्थिति गंभीर है। आज़ाद पर क्षेत्र में 10 मार्च से सफाई अभियान चल रहा है।
बन सकता है राजनैतिक मुद्दा 
ऐसा नहीं है की दिल्ली में रेलवे ट्रैक किनारे पर यह अतिकर्मण अब हुआ है।  न ही सेफ्टी ज़ोन का उलघन अब हुआ है। यह सालों पुराना मुद्दा है। सभी पार्टियां यह कहती रही है की दिल्ली में किसी भी झुग्गी को बिना वैकल्पिक जगह दिए नहीं हटाया जाएगा।  ऐसे में ठीक दिल्ली विधान सभा चुनाव के बाद ही रेलवे की यह सख्ती न चुनाव परिणाम का के साइड इफेक्ट के रूप में देखी जा रही है बल्कि राजनैतिक पार्टियों  बदलते रंग का भी प्रगट प्रमाण है। कोई भी इस मुद्दे पर बोल नहीं रही है बल्कि बहाने तैयार करने की तैयारी में है।
गौतलब है की झुग्गियों में रहने वाले गरीब परम्परागत रूप से कांग्रेस के वोट बैंक माने जाते रहे है।  केंद्र और दिल्ली में दोनों जगह कांग्रेस की ही सरकार थी लिहाज़ा इन्हे अन्यत्र बसने का मामला टलता रहा।  अब कांग्रेस का सफाया हुआ तो भी यह वोट बैंक पूरा का पूरा आम आदमी पार्टी कोई और सरक गया।  ऐसे में माना यह जा रहा है की बीजेपी इस वोट बैंक पर अपनी आस छोड़ चुकी है। अब पार्टी को फायदा न हो तो कम से काम रेलवे और रेल यात्रियों को तो रहत मिले।  दिल्ली के प्रदूषण को तो बढ़ने से रोका जा सके।
यदि इन झुग्गियों में रहने वालों को वादे के मुताबिक झुग्गियों के बदले फ्लेट मिल जाए तो लाभ जिंदगी का स्तर इनका भी बढ़ जाता।  जान का ख़तरा इनका भी काम हो जाता। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार इन झुग्गियों को बचाने में क्या कुछ भूमिका निभा पाती है यह देखना अभी बाकी है।

 

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