मध्यप्रदेश में कांग्रेसी विधायकों ने विधानसभा के गर्भगृह में गुजारी सारी रात

मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में एक नया हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला है। प्रदेश में ओला पीड़ित किसानों की मदद की मांग को लेकर मंगलवार को अनुपूरक बजट पारित कराने के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान कांग्रेसी विधायकों ने न केवल विधानसभा में जमकर हंगामा किया, बल्कि वे रजाई-गद्दे लेकर विधानसभा में ही रातभर के धरने पर डटे रहे। पीड़ित किसानों को लेकर सदन में मुख्यमंत्री के जवाब से नाखुश कांग्रेसी विधायकों सत्तारूढ़ दल के तीन मंत्रियों और स्वयं विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी विधायकों को मनाने के बहुत प्रयास किए, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए।
मध्यप्रदेश के विधानसभा भवन में मौजूद गर्भगृह में, जहां वैसे तो सदन की कार्यवाही चलती है, लेकिन मंगलवार को विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने ओला पीड़ित किसानों की मांगों को लेकर गर्भगृह को ही धरना स्थल बना दिया। विधायकगणों ने मागों के प्रति सरकार का कोई उचित आश्वासन न मिलते देख रजाई-गद्दे लेकर यहीं डेरा डाल लिया। मंगलवार को अनूपूरक बजट के लिए बुलाई गई एक दिवसीय विधानसभा के स्थगित होने के बाद भी कांग्रेसी विधायकों ने सदन में अपने नेता यानि नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के नेतृत्व में अनिश्चिकालीन धरने पर बैठने का मन मना लिया और दिन के बाद रात को भी यहीं डटे रहे।
प्रदेश के सत्तारूढ दल भाजपा से मांग कर रही कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि पीड़ित किसानों को तीस दिन में मुआवजा मिले। बिजली बिल और लोन वसूली के लिए जारी कुर्की के आदेश वापस लिए जाएं और किसानों को एक रुपए मूल्य पर अनाज मिले।
मंगलवार देर रात विपक्षी विधायकों को मनाने भाजपा सरकार के संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा और परिवहन मंत्री भूपेन्द्र बघेल और विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा भी पहुंचे लेकिन इन विपक्षी विधायकों ने इनकी एक न सुनी। विधानसभा के गर्भगृह में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ चुके कांग्रेसी विधायकों की सरकार के प्रति और सरकार की कांग्रेस के प्रति रणनीति क्या होगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल प्रदेश की राजनीति में नया बबाल मचने वाला है।

 

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