2006 के हत्या मामले में रामपाल की जमानत रद्द

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने वर्ष 2006 के हत्या के एक मामले में विवादास्पद ‘स्वयंभू संत’ रामपाल की जमानत आज रद्द कर दी और उन्हें तत्काल हिरासत में लिए जाने का आदेश दिया। उच्च न्यायालय ने जमानत रद्द करने के आदेश की घोषणा हरियाणा के महाधिवक्ता और हिसार में बरवाला पुलिस थाने के प्रभारी (एसएचओ) द्वारा पेश आवेदन के तुरंत बाद की जिसमें कहा गया है कि अदालत की अवमानना के मामले में रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। न्यायाधीश एम जयपाल और दर्शन सिंह की पीठ ने आदेश दिया कि रामपाल को 2006 के हत्या मामले में तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए। अदालत की अवमानना मामले में अदालत में पेश होने में विफल रहने पर दस नवंबर को अदालत ने जमानत रद्द करने के मुद्दे का स्वत: संज्ञान लिया था और बचाव पक्ष, सरकार तथा अदालत के न्याय मित्र को सुनने के बाद फैसला 18 नवंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था। पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच दो सप्ताह से अधिक समय तक चले तनावपूर्ण गतिरोध के बाद रामपाल को बीती रात बरवाला स्थित उनके आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया था। अवमानना मामले में पेश नहीं होने को लेकर रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था और वह गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। महाधिवक्ता बी आर महाजन तथा बरवाला के एसएचओ अनिल कुमार द्वारा बीती रात रामपाल की गिरफ्तारी की सूचना संबंधी आवेदन अदालत के समक्ष रखे जाने पर उच्च न्यायालय ने आज निर्देश दिया कि अवमानना मामले में रामपाल को दोपहर बाद दो बजे पेश किया जाए। उच्च न्यायालय परिसर के चारों ओर भारी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। रोहतक जिले के करौंथा में रामपाल के आश्रम में हुए संघर्ष के बाद वर्ष 2006 में दर्ज हत्या के मामले में ‘स्वयंभू संत’ जमानत पर है। इस घटना में एक व्यक्ति मारा गया था और कई अन्य घायल हुए थे। ‘स्वयंभू संत’ पांच नवंबर, दस नवंबर और 17 नवंबर को तीन मौकों पर अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए थे। अदालत परिसर में आज बड़ी संख्या में आम जनता और मीडिया कर्मी मौजूद हैं जहां कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने इस सप्ताह के शुरूआत में रामपाल के खिलाफ 21 नवंबर को पेश होने के लिए नए सिरे से गैर जमानती वारंट जारी किया था। उनके वकील ने कहा था कि वह ‘‘बीमार’’ हैं। अदालत ने हरियाणा और पंजाब सरकार, केंद्र सरकार तथा चंडीगढ़ प्रशासन को भी निर्देश दिया था कि वे रामपाल की अदालत में पेशी के लिए किए गए सुरक्षा प्रबंधों पर आए खर्च के ब्यौरे के संबंध में बयान दाखिल करें।


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