सिग्नेचर ब्रिज से दिल्ली को मिलेगी एक नई पहचान-श्री जितेन्द्र सिंह तोमर

पर्यटन मंत्री ने की सिग्नेचर ब्रिज के प्रगति कार्य की समीक्षा
श्री तोमर ने दिए ब्रिज निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश
नई दिल्लीः दिल्ली के पर्यटन, गृह, कला एवं संस्कृति मंत्री श्री जितेन्द्र सिंह तोमर ने आज उत्तरी-पर्व दिल्ली में वजीराबाद पुल के ऊपर पर्यटन विभाग द्वारा बनाए जा रहे सिग्नेचर ब्रिज के प्रगति कार्य की समीक्षा की। इस मौके पर दिल्ली पर्यटन एव परिवहन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री रमेश तिवारी, पर्यटन मंत्री के सचिव श्री जी.पी. सिंह और पर्यटन विभाग के विरिष्ठ अधिकरी उपस्थित रहे। श्री तोमर ने मौक पर उपस्थित पर्यटन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि ब्रिज का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा कर इसे जनता को समर्पित किया जाए। श्री तोमर ने सिग्नेचर ब्रिज के सभी पहलुओं के बारे में जानकारी ली।

श्री जितेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि यह देश का ऐसा पहला सिंगल पाइलन ब्रिज होगा जिसके बीच के सिरे के एक तरफ का बैलेंस 18 मोटी केबलों से सधा होगा और उसके नीचे कोई पिलर नहीं होगा और दूसरी ओर मात्र चार केबलेें होगी। यह पूरा ब्रिज स्टील का बना हुआ और तारों से झूलता हुआ होगा। हाई तकनीक से बन रहा यह ब्रिज पूरी तरह से भूकंपरोधी होगा। ब्रिज के बीचोंबीच बनने वाले मेहराब की ऊंचाई 154 मीटर की होगी और उसके ऊपर विशेष प्रकाश व्यवस्था होगी ताकि रात मे वह दूर से भी दिखाई दे।
पर्यटन मंत्री ने कहा कि विदेशी तकनीक पर तैयार हो रहे इस ब्रिज के साजो-सामान को विदेश से मंगवाया जा रहा है। 150 मीटर ऊंचे टावर स्टील केे बने है। टावर के साथ-साथ यमुना पर बनने वाले पुल के लिए 250 मीटर लंबा स्पैन होगा जिसमें 8 लेन होंगी। टावर को वजीराबाद बैराज के सामने दो वड़े पिलरों पर खड़ा किया जाएगा। टावर को बांधने क लिए दो बड़े फाउंडेशन बेल बनाए गए है। टावर का सारा भार ये फाउंडेशन वेल ही संभालेंगे। ये वेल एक-एक हजार टन के लोहे और कंकरीट भरकर बनाए जा रहे है। टावर के केबलों को इन फाउंडेशन वेल में बांधा जाएगा। ब्रिज को केबल के तारों की सहायता से तैयार किया जाएगा। पूरे सिग्नेचर ब्रिज की लम्बाई 675 मीटर की है। मुख्य पुल से पश्चिमी तरफ 100 मीटर क्षेत्रफल को पर्यटकों के गंतव्य के रूप में विकसित किया जाना प्रस्तावित है इसके सौंदर्यीकरण की संरचनात्मक व्यवस्था करनी है।
श्री तोमर ने यह भी बताया कि आउटर रिंग रोड पर फ्लाईओवर का कार्य पूरा होने पर 1 मार्च 2014 को यातायात के लिए इसे खोल दिया गया है। आई.एस.बी.टी. के लिए वजीराबाद पुल से सड़क का काम पूरा होने के अग्रिम चरण में है और अप्रैल 2015 तक इसको भी यातायात के लिए खोल देने की संभावना है। सिग्नेचर ब्रिज के साथ फ्लाईओवर को जोड़ने के लिए तटबंध और पार जल निकासी कार्य प्रगति पर है। इस कार्य के जून 2015 तक पूरा होने की संभावना है। राजधानी में आने वाले पर्यटकों को अगले एक वर्ष में कैलीफोर्निया व शंधाई की तरह दिल्ली में भी गगनचुंबी टावर पर आकर्षक सिग्नेचर ब्रिज लहराता दिखाई देगा। जिस तरह से विदेशों में लिबर्टी आॅफ स्टेचू, क्वीन टावर, लंदन ब्रिज आदि है वैसे ही आने वाले समय में सिग्नेचर ब्रिज नई कलात्मक पहचान बनेगा। जो कि दिल्ली क्या भारत की नई पहचान बनेगा।
दिल्ली पर्यटन एव परिवहन विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री रमेश तिवारी पर्यटन मंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि इस ब्रिज की नींव का काम पूरा होने के उन्नत चरण में है। खम्भों में कुल 18 में से 16 की नींव का काम पूरा कर लिया गया है। बाकी कार्य भी पूर्ण प्रगति पर है और इसे जल्द ही पूरा करने की संभावना है। इस ब्रिज के निर्माण की जिम्मेदारी गैमन इंडिया को दी गई है। यह कंपनी ब्राजील की इंडाडे व इटली की तानसेचाई कंपनी के साथ ज्वांइट वेंचर के रूप में इस पुल का निर्माण कर रही है। इस पुल की लागत 1131 करोड़ रूपये है। यह पुल ट्रांस यमुना क्षेत्र को बाहरी व उत्तरी दिल्ली से जोड़ेगा।
श्री तिवारी ने बताया कि यह पुल पूर्वी हिस्से में खजूरी खास चैराहे पर पश्चिमी और एन.एच.- 1 (रोड़ न0 45) और सीमांत बांध रोड में शामिल हो जाएगा। आसपास के क्षेत्र में तिमारपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र, दिल्ली नेहरू विहार में एन.एच.-1 और तीन मौजूदा चैहारे संकेत मुक्त आवाजाही सुनिश्चिम करने के लिए वजीराबाद पुल एकीकृत किया गया है और  एक व्यापक योजना के द्वारा लूप्स, रैंप ओर फ्लाईओवर से मिलकर विकसित किया गया है।
श्री तिवारी ने पर्यटन मंत्री को यह जानकारी भी दी कि तोरण और डेक गर्डरों का निर्माण चीन की कार्यशाला में किया जा रहा है। चार खेपे साइट पर आ चुकी है और 5 खेपे सितम्बर 2015 तक आने की संभावना है। ब्रिज के लिए तोरण और इस्पात गार्डरों के लिए निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस ब्रिज में लगने वाली केबल का निर्माण मैसर्स ज्मदेंबबपंप कम्पनी द्वारा स्विट्जरलैंड में हो रहा हैैै। जिसकी मई 2015 तक पहुंचने की उम्मीद है। पुल के सभी बीयरिंग, जर्मनी साइट पर पहुुच गए है। जिसे मैसर्स डंनतमत ैव्भ्छम्  द्वारा एकत्रित किया जा रहा है। निर्माण कार्य सभी पूरे हो चुके है। मुख्य पुल मार्च 2016 तक पूरा होने की संभावना है।
यह परियोजना जर्मन की है। इस ब्रिज का मूल टाॅवर जो कि स्टील से बनेगा वह चीन से निर्मित करवाकर मंगवाया जायेगा। इस परियोजना पर कार्य प्रगति पर है और उम्मीद है कि जल्द से जल्द यह कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

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