सरकार को बीमा विधेयक पारित होने की उम्मीद

हैदराबाद संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने में केवल दो दिन बाकी होने के साथ आज संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने बीमा विधेयक पर विचार किए जाने और विपक्ष के समर्थन से विधेयक पारित किए जाने का भरोसा जताया। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सभी प्रयास करेंगे। क्योंकि जनहित महत्वपूर्ण है। मैं पहले ही स्थिति को समझने की अपील के साथ विपक्षी दलों से बात कर रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि वह सोमवार को हमारी मदद करने की कोशिश करेंगे।’’ बीमा विधेयक पारित कराने के लिए सरकार के विपक्ष से संपर्क करने की बाबत सवाल पूछने पर नायडू ने ये बातें कहीं। बीमा विधेयक के तहत निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का दायरा (एफडीआई) 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत किये जाने का प्रस्ताव है। संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने में केवल दो दिन बचे हैं और ऐसे में कुछ पार्टियों के कड़े विरोध को देखते हुए सरकार के आर्थिक सुधारों का एजेंडा विशेषकर बीमा विधेयक एवं कोयला विधेयक की किस्मत अधर में लटकी हुई है। सदन की कार्यवाही लगातार बाधित होने की वजह से राज्यसभा में बीमा विधेयक पर विचार नहीं किया जा सका हालांकि इसे पिछले हफ्ते चार बार सूचीबद्ध किया गया था। जम्मू-कश्मीर में त्रिशंकु विधानसभा होने की स्थिति में भाजपा की भूमिका के बाबत सवाल पूछने पर नायडू ने कहा, ‘‘पहले नतीजे आने दीजिए। अभी से बड़े दावे नहीं करने चाहिए। लेकिन मैं एक दावा कर सकता हूं कि कांग्रेस आखिरी पायदान पर होगी।’’ उन्होंने हिन्दू महासभा के एक नेता द्वारा कथित तौर पर नाथूराम गोडसे की मूर्तियों को स्थापित करने की मंजूरी मांगने की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा इसकी मंजूरी देने का सवाल ही नहीं उठता। पिछले पूरे हफ्ते विपक्ष ने धर्मांतरण के मुद्दे पर बहस को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जवाब की मांग को लेकर राज्यसभा की कार्यवाही बाधित की थी। आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने का समर्थन करने को लेकर सवाल पूछे जाने पर नायडू ने कहा कि सरकार व्यापक सहमति के बिना इसे लेकर कोई कानून नहीं लाएगी। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा पहले ही घोषणा कर चुकी है कि देश के वर्तमान हालात को देखते हुए धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाना सही होगा।’’ केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘लेकिन यह तभी संभव होगा जब देश में आम सहमति बने। बिना सहमति के सरकार इस तरह का कोई कानून नहीं लाएगी। सलाह दी जा चुकी है। हर किसी को सलाह देने का हक है। आपको टिप्पणी करने का हक है।’’


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