संत रामपाल ने बनाया समर्थकों को ढाल, पुलिस ने आश्रम घेरा

हिसार। हरियाणा के हिसार में संत रामपाल की गिरफ्तारी को लेकर सरकार और उनके समर्थकों के बीच ठनी हुई है। स्थानीय प्रशासन को हर हाल में उन्हें सोमवार को हाईकोर्ट के आगे पेश करना है, जबकि संत के समर्थक अब भी उनकी खराब सेहत की दलील के साथ अड़े हुए हैं। संत के समर्थकों का कहना है कि वो जान दे देंगे मगर अपने गुरु की गिरफ्तारी नहीं होने देंगे। इस बीच प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बरवाला में पुलिस और सुरक्षा बलों की 35 कंपनियां तैनात कर दी हैं। संत को पेशी के लिए मनाने की सियासी कोशिशें भी जारी हैं, खुद मुख्यमंत्री ने उनसे सरेंडर की अपील की है।

संत रामपाल इस पेशी पर भी हाईकोर्ट जाने को तैयार नहीं दिख रहे। वो बरवाला आश्रम के भीतर ही स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी की कवायद और एहतियाती बंदोबस्त तेज कर दिया है। शनिवार की रात से लेकर रविवार सुबह तक तकरीबन 35 कंपनियां आश्रम के इर्द-गिर्द डेरा डाल चुकी थीं। किसी भी स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी है। बसें, दमकल गाड़ियां, एंबुलेंस, क्रेनें और जेसीबी मशीनें भी तैनात हैं। नजदीकी अस्पतालों को भी अलर्ट कर दिया गया है लेकिन इन हालात का असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ रहा है।

प्रशासन का रुख इस बार सख्त है इसका अहसास शनिवार की रात ही हो गया था। रात में ही सुरक्षा बलों की बटालियनें पोजीशन लेने लगी थीं। बरवाला के सतलोक आश्रम की बिजली-पानी काट दी गई है। आश्रम के भीतर बच्चे भी हैं जिनके लिए दूध वगैरह भी नहीं जा पा रहा है। जाहिर है प्रशासन की कोशिश संत के अड़ियल समर्थकों को झुकाने और उन्हें गिरफ्तारी के लिए मनाने की है।

दूसरी ओर प्रशासन की तमाम सख्ती के बावजूद संत रामपाल के समर्थक झुकते नहीं दिख रहे। सप्लाई बंद होने से आश्रम की व्यवस्था बुरी तरह गड़बड़ा गई है। सूत्रों का ये भी कहना है कि भीतर बामुश्किल दो दिन का राशन-पानी बचा है। इस बीच प्रशासन ने बैक चैनल से भी बाबा को पेशी के लिए मनाने की कोशिश की है, जिसका असर सिर्फ इतना हुआ कि संत के समर्थक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उनकी पेशी के लिए तैयार हैं लेकिन गिरफ्तारी और सरेंडर की बात होते ही मरने-मारने और जान देने की बात करने लगते हैं।

संत रामपाल के प्रवक्ता पुरुषोत्तम ने कहा कि पुलिस का हमें इंतजार है। अन्न-जल बंद कर दिया गया है। बच्चे हैं लेकिन दूध बंद कर दिया गया है। वो मारेंगे तो हम मरने के लिए तैयार हैं। कोई बातचीत नहीं कर रहा है। प्रशासन की तरफ से कोई बातचीत के लिए नहीं आया है।

इस बीच संत रामपाल से मध्यस्थता की सियासी कोशिशें भी चालू हैं। पूर्व मंत्री और विधायक जयप्रकाश पहले ही मध्यस्थता में लगे थे। इस बीच कुछ बीजेपी नेता भी उन्हें मनाने में लग गए हैं। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संत रामपाल से अदालत का सम्मान करते हुए सरेंडर की अपील की है।

गौरतलब है कि ये मामला 2006 में रोहतक के करौंथा आश्रम पर हुए गोलीकांड से जुड़ा है। बीते साल जुलाई में संत रामपाल के समर्थकों ने इस मामले में एक पेशी के दौरान जिला अदालत की कार्रवाई में दखलंदाजी की थी। इसके बाद रामपाल के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज हुआ। जिसमें लगातार संत रामपाल पेशी से बच रहे हैं। 10 नवंबर को पेश न होने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को 17 नवंबर तक हर हाल में उन्हें अदालत में पेश करने का आदेश दिया था।

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