प्रज्ञा साहित्यिक मंच के द्वारा काव्यगोष्ठी का आयोजन

रोहतक-आज विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर प्रज्ञा साहित्यिक मंच के द्वारा सिविल सर्जन कार्यालय में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमे विशेष रूप उपस्थित कवियों ने रक्तदान, स्वास्थ्य व् पर्यावरण विषयों पर रचनाओं का पाठ किया। इस अवसर पर डॉ मधुकांत की पुस्तक ‘पोस्टमार्टम’ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्यातिथि सिविल सर्जन डॉ शिव कुमार व् अध्यक्षता डॉ पी के सहगल विभागाध्यक्ष ब्लड बैंक पी जी आई रोहतक ने की। कार्यक्रम का संचालन मंजुल पालीवाल ने किया।
डॉ मधुकांत की 70 वी. पुस्तक ‘पोस्टमार्टम’ का विमोचन करने के बाद मुख्यातिथि डाॅक्टर से कवि बने डॉ शिव कुमार ने परोपकार की भावना जाग्रत करते हुए पंक्तिया प्रस्तुत की। डाॅ शिव कुमार ने सुनाया कि गमों की आंच में आंसू उबाल कर देखो, बनेगे रंग किसी पर डाल कर देखो । तुम्हारी दिल की चुभन जरूर कम होगी, किसी के पांव का कांटा निकालकर देखो।
कुछ इसी तरह वेदना को महसूस करते हुए वरिष्ठ गीतकार वीरेंदर मधुर ने ग़ज़ल के माध्यम से जिन्दगी और दोस्ती के उपर कटाक्ष किए-आँख के आंसू भला किस काम के, दर्द जब है जिंदगी के नाम के। जिसने चाहा दिल लगाने के लिए, हाथ में पत्थर मिले अवाम के।
पीड़ा का हल निकालते हुए मन्जुल पालीवाल ने रक्तदान की महत्ता पर अपनी पंक्तिया प्रस्तुत की। पालीवाल ने सुनाया कि खून वो खून है कि जो देश के काम आ जाये, जवानी वो जवानी है कि जो इतिहास बनजाये। जिया करते है घुटनों बल बहुत से जिंदगी यारों, वो जीवन ही तो जीवन है किसी के काम आ जाये।

इस कारवां को युवा गजलकार डाॅ.अनुज नरवाल रोहतकी ने आगे बढाते हुए गांवों के माहौल को ठीक बताते हुए और बुर्जुगों के मर्म को प्रस्तुत करते हुए गजल के माध्यम से यूं ब्यान किया- सब्ज खेतों उन ताजा हवाओं के जानिब, शहरों तुम लौट चलो गावों के जानिब। भूल चुके हो तुम जिनको वो राह तुम्हारी तकते हैं, इक बार हो जाओ उन मात-पिताओं के जानिब।
युवा कवि अविनाश सैनी ने लहू पर मार्मिक कविता सुनाते हुए कहा कि अजब खुशी का फूटेगा मन में फब्बारा, लहू हमारा लहू तुम्हारा एक है सारा।
वरिष्ठ साहित्यकार प्रो श्याम लाल ने खुशी को घर में न्यौता देते हुए कहा कि मेरे घर गमों ने लगा रखा है आने जाने का बहाना, ए खुशी तू भी कभी मेरे घर आना।
युवा साहित्यकार अर्जुन निराला ने फुटपाथ पर रहने वाले बच्चे -बच्चियांें और लाल-बत्ती के बीच की तस्वीर को बड़ी बारीकी और संवेदना के उकेरते हुए कहा कि अगर न होती लाल लाल-बत्तियां, तो कहां जाते बच्चे बच्चियां।
कवियित्री राजल गुप्ता ने रक्तदान को कुछ इस तरह से अपनी रचना में पिरोया- मानो न मानो रगो में दौड़ता लहू, गैर को भी अपना बना सकता है। कवयित्री रेणु ने कहा कि आकाश से दिनभर चलकर घर लौट कर सूरज आता है, जब शाम उसे हौले से अपने आंचल में उसे छुपाती है।
डीएन शर्मा ने देश में हो रहे भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए सुनाया कि आप जिसे देखो वहीं देश रहा लूट कविता प्रस्तुत की।
नीरज बंसल ‘पत्थर’ ने रक्तदाता की महिमा का गुणगाान करते हुए सुनाया कि- नित नया बनाता देह रूधिर, थोड़ा जो दे दोगे किसी को फटता नहीं आसमान है, रक्तदाता सबसे महान है।।
स्वप्नीला अग्घी प्रेहलिका ने सृष्टि और मानव में संबंध को जोड़ती हुई रचना प्रस्तुत की। इसके अलावा डाॅ अंजना गर्ग ने स्वास्थ्य सेवाओं पर कटाक्ष करती हुई पैसा नामक लघुकथा सुनाई। वहीं राजल गुप्ता ने खाद्य पदार्थों में हो रही मिलावट पर बाकी सब ठीक है नामक व्यग्य रचना सुनाई। युवा लघुकथाकार डाॅ कपिल कौशिक ने जहरीला कौन नामक लघुकथा के माध्यम से इंसान और सांप में समानता से भरी रचना प्रस्तुत की।
इस मौके पर बतौर श्रोता के रूप में डिप्टी सीएमओ डाॅ कुलदीप, डाॅ विनीत यादव, डाॅ अनुपंमा, डाॅ जोगेंद्र शर्मा, देवेंद्र चहल रेड क्राॅस सचिव, समाज सेवी गोविंद राम सिंघल, सुभाष गुप्ता, डाॅ गोपाल किशन एव किशन लाल मौजूद रहे।

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