राजधानी में फैला मधुमेह का खतरा

हाल ही में एम्स के एक अध्ययन से ये बात साफ़ हुई है की दिल्ली में 47.6 फ़ीसदी लोग मधुमेह से पीड़ित होने की कगार पर पहुंच चुकें हैं। जो अगले कुछ दिनों में इस बीमारी से पीड़ित हो जायेंगे।
चिकित्सकों के अनुसार मधुमेह पीड़ितों की अधिक संख्या तो चिंता का विषय है ही लेकिन उससे भी गंभीर विषय है प्री-डायबिटिक रोगीओं की बढ़ती संख्या।
मधुमेह के बढ़ते खतरे का सबसे बड़ा कारण है लोगों की जीवनशैली, दिनचर्या और खानपान में संतुलन न होना। बिज़ी शेडूल के कारण लोगों के जीवन में ऐसा बदलाव आ गया है कि उन्हें खाना खाने की भी फुरसत नहीं मिलती।
डॉकटरों का कहना है की अगर जीवनशैली और खानपान की आदतों को नहीं बदला गया तो मधुमेह पीड़ितों की संख्या और भी बढ़ सकती है। मधुमेह के चलते ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर जैसी खतरनाक बिमारिओं के होने की संभावना भी बड़ जाती है। इससे आँखों की रोशनी जाने का भी खतरा होता है।
मधुमेह के मरीजों की बड़ती संख्या को देखते हुए इस बार डब्ल्यू.एच.ओ ने भी वर्ल्ड स्वाथ्य दिवस पर मधुमेह को परास्त करो थीम रखी थी, इसका मकसद लोगों को मधुहमेह के लिए जागरूक करना है।
डॉक्टर्स के अनुसार मधुमेह के मरीज़ अगर नियमित रूप से सैर और व्यायाम करें और संतुलित आहार का सेवन करें तो मधुमेह के खतरे से बच सकते हैं।
आजकल मीडिया के बढ़ते दौर में जब बच्चे दिनभर टीवी के सामने चिपके रहते हैं, और पॉपकॉर्न, चिप्स का सेवन करते हैं, फास्टफूड तो जैसे रोज़ की ज़रूरत बन गया है इन्ही कारणों की वजह से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर आदि जैसी बीमारियां उभर रहीं हैं।
5365 लोगों पर अध्ययन करने के बाद ये नतीजा सामने आया कि 47.6 फ़ीसदी लोग मोटापे और उच्च कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित हैं और इसे कारण  मधुमेह का खतरा बड़ गया है। आंकड़ों को देखा जाय तो आज देश में लगभग 6.6 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित हैं।
कैसे करें बचाव 
पैदल चलने से संभव है मधुमेह का इलाज- 
आजकल लोगों की जीवनशैली इतनी व्यस्त हो गई की उनके लिए अपने स्वास्थ पर ध्यान देना मुश्किल हो गया है। दिनभर ऑफिसों में कंप्यूटर के सामने और घर पहुंचकर टीवी के सामने समय गुज़ारते लोग ये भूल जाते हैं की उन्हें अपनी सेहत पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
ऐसी ही दिनचर्या के चलते बिमारिओं ने हमें घेर रखा है।  अगर मधुमेह की समस्या से आज़ाद होना चाहते हैं तो रोज़ाना कम से कम 50 मिनट तक सैर करना या पैदल चलना शुरू कर देना चाहिए।
अगर 50 मिनट पैदल चलकर अपना वज़न 10 फ़ीसदी तक कम कर लें तो मधुहमेह से बचाव संभव है।
 
तुलसी, बरगद, जामुन भी है मधुहमेह के लिए कारगर-
सूत्रों के अनुसार ये माना जा रहा है कि तुलसी, बरगद और जामुन की पत्तिओं का मिश्रण टाइप 2 मधुमेह के लिए कारगर है।  मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसका दवाओं से सिर्फ नियंत्रण हो सकता है, ख़त्म नहीं किया जा सकता। दवाएं जीवन भर लेनी पढ़ती है। इसलिए ये ज़रूरी है की हर्बल दवाओं का प्रयोग किया जाए जिससे कोई साइड इफ़ेक्ट होने का खतरा नहीं हो और जड़ से बीमारी का समाधान हो सके।

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