मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर की मीडियाकर्मियों के चिन्हिकरण की मांग

देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता निशीथ सकलानी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उत्तराखण्ड आन्दोलन के दौरान समाचारों के माध्यम से राज्य निर्माण में सहयोग देने व आन्दोलन से सम्बन्धित समाचारों को प्रमुखता देने वाले मीडियाकर्मियों सहित ऐसे सभी लोगों के चिन्हिकरण की मांग की है, जिनकी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका होने के बावजूद उनका कहीं कोई सरकारी रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
श्री सकलानी ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिखकर आन्दोलन से सम्बन्धित समाचारों को प्रमुखता देने वाले सभी मीडियाकर्मियों के चिन्हिकरण की मांग करते हुए सभी को समान पेन्शन के अलावा ऐसे आन्दोलनकारियों को सरकारी सेवा में लेने की मांग की है जो पेन्शन के दायरे में नहीं आ सकते। उन्होने मुख्यमंत्री से 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को तत्काल बहाल करते हुए सभी चिन्हित राज्य निर्माण आन्दोलकारियों को राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा दिये जाने की मांग की है। उन्होने ऐसे कांग्रेसी नेताओं के विरूद्ध कार्यवाही की मांग की है जो उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों को दी जा रही आंशिक सुविधाओं को बंद किये जाने की बेतुकी बात कह कर राज्य में कांग्रेस के लिए भस्मासुर साबित हो रहे हैं। राज्य निर्माण आन्दोलकारियों के बारे में उल्टी-सीधी बयान बाजी कर राज्य का माहौल खराब करने वाले कांग्रेसी नेताओं पर अंकुश लगाने की मांग करते हुए श्री सकलानी ने कहा कि मानसिक रूप से दिवालिये हो चुके ऐसे कुंठित कांग्रेसी नेताओं को अपनी हद में रह कर बयान बाजी करनी चाहिए।
उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार व कांग्रेस संगठन के लोग अब राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों के सब्र का इम्तिहान लेना बन्द करें और उनकी मांगों के निस्तारण की दिशा में सोचना शुरू कर दें। क्योंकि अब राज्य निर्माण आन्दोलनकारी सडकों पर ऊतर आये हैं। यदि ऐसे कांग्रेसी नेता अपनी हरकतों से बाज नहीं आये तो राज्य निर्माण आन्दोलनकारी उन्हे निश्चित रूप से सबक सिखायेंगे। उन्होने कहा कि यदि समय रहते मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों की मांगे नहीं मानी तो आने वाले समय में राज्य से कांग्रेस सरकार की विदाई निश्चित रूप से तय है। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी संयुक्त सघर्ष समिति के प्रदेश प्रवक्ता श्री सकलानी ने कहा कि सरकार में बैठे लोग पूरे प्रदेश में अवैध खनन का खुल्ला खेल खेल कर अपनी तिजोरियों भरने में लगे हैं संसाधन विहिन इस राज्य में विधायकों, मंत्रियों व पूर्व मुख्यमंत्रियों पर भी सरकार जम कर खर्च कर रही है जबकि राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों के सम्मान व उनकी जायज मांगों के लिए लगातार बहाने बाजी कर उन्हे बरगलाने की कोशिश कर रही है।

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