भारत को उम्मीद भरी निगाह से देख रहा विश्वः मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में संपन्न तीन देशों की अपनी दस दिवसीय यात्रा के अनुभवों को आज साझा करते हुए कहा कि इस दौरान उन्होंने पाया कि दुनिया हिन्दोस्तान को नये सम्मान से देख रही है और विश्व मंच पर भारत सकारात्मक फर्क ला सकता है। उन्होंने कहा कि म्यांमार, आस्ट्रेलिया और फिजी की इस यात्रा में वह विश्व के 38 नेताओं से मिले तथा 20 के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और ‘‘मैंने उनकी आंखों में पाया कि वे चाहते हैं कि शांतिपूर्ण, स्थिर और विकसित वैश्विक समुदाय के लिए भारत अपनी भूमिका निभाए।’’ मोदी ने कहा, ‘‘विश्व भारत को नए उत्साह के साथ देख रहा है। ..मैं आश्वस्त हूं कि विश्व मंच पर भारत सकारात्मक फर्क ला सकता है।’’ कालाधन के बारे में उन्होंने कहा कि समूह-20 की बैठक में भारत ने कालेधन के अस्तित्व और उसकी वापसी के मुद्दे को विश्व समुदाय के समक्ष जोरदार ढंग से उठाया। ब्लाग के जरिए अपनी यात्रा के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि विश्व समुदाय ने इस पर गौर किया क्योंकि यह ऐसा मुद्दा है जो किसी एक देश को चयनित ढंग से प्रभावित नहीं कर रहा है। कालेधन के खतरे में विश्व की शांति और सौहार्द को अस्थिर करने की क्षमता है। कालाधन आतंकवाद, धन शोधन (मनी लांडरिंग) और मादक द्रव्य के अवैध व्यापार को भी साथ लाता है।’’ मोदी ने कहा कि कालेधन के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाने का समूह-20 से बेहतर मंच नहीं हो सकता था और ‘‘आधिकारिक विज्ञप्ति (समूह-20 की) में इस मुद्दे को प्रतिबिंब किया जाना दर्शाता है कि हमारे प्रयास रंग लाए।’’ उन्होंने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं कानून के शासन से पूरी तरह प्रतिबद्ध होती हैं और यह हमारा कर्तव्य है कि हम इस बुराई से सामूहिक रूप से लड़ें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इन दस दिनों में वह विश्व के इतने सारे नेताओं से मिले और उन्होंने पाया कि वे हमारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल को लेकर काफी आशान्वित हैं। वे भारत की इस पेशकश से पैदा होने वाले अवसरों का हिस्सा बनने के लिए भारत आने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे ऐसे सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा हूं जो भारत के युवाओं के लिए अपार अवसर लाएगा और उन्हें ऐसे अनुभव उपलब्ध कराएगा जिससे वे अपने हुनर को और चमका सकें।’’ मोदी ने कहा कि दुनिया आज जिस तेजी से विकसित हो रही है उसे देखते हुए हमारे युवाओं को अपने हुनर को और बेहतर बनाने के लिए ऐसे अवसर और अनुभव मिलना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि विश्व के कई नेताओं ने भारत में ‘अगली पीढ़ी की आधारभूत संरचनाएं और स्मार्ट सिटी’’ विकसित करने की देश की महत्वकांक्षी योजनाओं में शामिल होने की इच्छा जताई। विश्व के इतने सारे नेताओं से सामूहिक और अलग अलग बातचीत करने को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हर नेता से हमने यह चर्चा की कि हम अपने संबंधों को और मजबूत, विविधतापूर्ण और व्यापक कैसे बना सकते हैं। चर्चाओें के केन्द्र में वाणिज्य, व्यापार को बढ़ाना और भारत में उद्योगों को लाने जैसे विषय रहे।’’ आस्ट्रेलिया में 28 और फिजी में 33 साल के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के जाने के संदर्भ में उन्होंने अपने पूर्ववर्तियों को परोक्ष रूप से निशाने पर लेते हुए कहा, ‘‘एक ओर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार क्रांति ने विश्व को काफी नजदीक ला दिया है लेकिन दूसरी तरफ, लगभग तीन दशकों तक हम इन दो देशों के किनारे नहीं पहुंच सके, जबकि दोनों अपने लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।’’


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