भारत केंद्रित वित्त नीतियों से मुद्रा बैंक करेगा असंगठित क्षेत्र का वित्तीय समावेश

देश में पहली बार माइक्रो एवं स्माल व्यवसाय को सरकार से जुडे
अरूण पाण्डेय
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आगामी 8 अप्रैल को नई दिल्ली में मुद्रा बैंक को लांच किया जाना देश के आर्थिक इतिहास में पहला ठोस कदम है जिसके द्वारा देश के नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर में लगभग ६ करोड व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जो देश में 46 करोड लोगों को रोजगार देते हैं ! नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के विभिन्न वर्गों के शिखर संगठन एक्शन कमेटी फॉर फॉर्मल फाइनेंस फॉर नॉन कॉर्पोरेट स्माल बिजनेस ने कहा की किसी भी सरकार द्वारा धनाभाव को धन देना की यह पहल देश की अर्थव्यवस्था को बदलेगी ! एक्शन कमेटी गत एक वर्ष से लगातार नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए पृथक रूप से एक वित्तीय ढांचा गठित करने की जोरदार वकालत कर रही थी !
श्री खण्डेलवाल ने कहा की दुनिया का सबसे बडा असंगठित बाजार भारत में ही है और मुद्रा बैंक पहला ऐसा कदम है जो इस सेक्टर की वित्तीय जरूरतों को पूरा करेगा ! अभी तक बैंकों द्वारा इस सेक्टर को ऋण देने में सदा आनाकानी की जाती थी जिसके कारण से ही मुद्रा बैंक के गठन की जरूरत महसूस हुई ! मुद्रा बैंक एक रेगुलेटर, डेवलपर और रिफाइनेंसर के रूप में काम करते हुए नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर को ऋण उपलब्ध करायेगा जिससे देश में व्यापार का और अधिक विकास होगा !
देश की राष्ट्रीय जीडीपी में नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर का हिस्सा 45 प्रतिशत है जबकि कॉर्पोरेट सेक्टर 15 प्रतिशत, कृषि 17 प्रतिशत और सरकार का हिस्सा 23 प्रतिशत है ! नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर प्रतिवर्ष 6 .28 लाख करोड की वैल्यू एडिशन करता है जिसमें से 61 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में और 39 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र की है ! नेशनल सैंपल सर्वे 2013 के अनुसार देश के नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर में 5 .77 करोड व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं जिनमें से 30 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग में, 36 प्रतिशत व्यापार में एवं 34 प्रतिशत सर्विस क्षेत्र में हैं ! लगभग 2 .07 करोड छोटा व्यापार, 1 .72 करोड लघु उद्योग तथा 1 .97 करोड सर्विस प्रदाता हैं !नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, ट्रक ऑपरेटर, लघु उद्योग, हॉकर्स, स्वयं उद्यमी एवं अन्य सेवा प्रदाता शामिल हैं और देश की आर्थिक गतिविधियों में 50 प्रतिशत से भी अधिक की भागीदारी होने के बावजूद भी सरकारी नीतियों का सारा ध्यान उन 5 प्रतिशत सेक्टर पर रहा जो सेंसेक्स कंपनियां है !
कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया ने कहा की अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन और देश में सबसे तेजी से विकास करने वाले सेक्टर के केवल 4: हिस्से को ही बैंकों से ऋण मिल पाया है जबकि बाकि बचे सेक्टर को नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी, कोआपरेटिव बैंक, चिट, साहूकार, परिवार अथवा मित्रों पर निर्भर रहना पडा है जिनसे 2: से लेकर 10: प्रतिमाह के ब्याज पर ऋण मिलता है ! इस सन्दर्भ में मुद्रा बैंक नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के वित्तीय विकास और रि-फाइनेंस में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा ! बैंकों द्वारा प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में से बचे हुए धन से मुद्रा को 20 हजार करोड रुपये का कैपिटल प्राप्त होगा और इसी कारण से मुद्रा के द्वारा मिलने वाले ऋण पर ब्याज की दर काफी कम रहने की सम्भावना है ! इक्रा के एक सर्वे के अनुसार सेल्फ हेल्प ग्रुप, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनीज एवं माइक्रो फाइनेंस कम्पनीज को मिलाकर देश में 30 सितम्बर, 2014 तक माइक्रो फाइनेंस का पोर्टफोलियो 780 बिलियन का है जिसकी आगे दो वर्षों में 1 ट्रिलियन होने की सम्भावना है ! मार्च 2016 तक नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनीज एवं माइक्रो फाइनेंस कंपनीज की ऋण राशि 360 -420 बिलियन हो जायेगी ! मुद्रा में इन सभी को पंजीकृत करने और इनके माध्यम से ऋण देने से नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर का बेहतर विकास होगा !
श्री खण्डेलवाल और श्री भरतिया ने मुद्रा को एक नियामक संस्थान बनाये जाने की जोरदार पैरवी करते हुए कहा की वर्तमान में सेल्फ हेल्प ग्रुप, नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनीज, माइक्रो फाइनेंस कम्पनीज, ट्रस्ट, सोसाइटी आदि जो नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर को ऋण उपलब्ध कराते हैं, अनेक विभिन्न कानूनो के अंतर्गत आते हैं ! नॉन कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए वित्तीय क्षेत्र में एकरूपता बनाने के लिए इन सभी को मुद्रा के अंतर्गत लाते हुए मुद्रा को नेशनल हाउसिंग बैंक की तर्ज पर नियामक बनाया जाए !

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