पूर्वोत्तर राज्यों में आपदा पर भरोसेमंद कम्युनिकेशन उपलब्ध कराने की पहल

गुवाहाटी। प्राकृतिक आपदाओं से मानव जीवन व संपत्ति को होने वाला भारी नुकसान हमारे देश और राज्य सरकार के लिए एक बडी चुनौती है। गंभीर आपदा स्थितियों में देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानव जीवन व संपत्ति की सुरक्षा करना और बिना समय गवाएं राहत बचाव कार्य को सुचारू रूप से चलाना है। इस दौरान मानव जीवन को बचाने के लिए आवश्यक साधन भी जुटाना है।

भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में मोबाईल टावर, पीएनटी लाईन, माईक्रोवेव टावर, उपग्रह संचार और अन्य कम्युनिकेशन सुविधाएं पूरी तरह से निश्क्रिय हो जाती हैं, जिससे एक स्थान का दूसरे स्थान से संपर्क समाप्त हो जाता हैं। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में आपदा के दौरान भरोसेमंद कम्युनिकेशन प्रदान करने के लिए एक आपातकालीन कम्युनिकेशन योजना को विकसित करने की पहल की है।
एनडीआरएफ महानिदेशक ओपी सिंह के निर्देशानुसार एक स्वतंत्र व भरोसेमंद और किसी भी आपदा में कार्य कर सकने वाले कम्युनिकेशन नेटवर्क का प्रशिक्षण, उपलब्ध संसाधनों और एचएएम रेडियो व अन्य राज्य की आपदा प्रबन्धन ऐजेंसीयों के समर्थन के द्वारा असम की राजधानी गुवाहाटी के मिर्जा स्थित प्रथम एनडीआरएफ में 2 मार्च से 02 मई तक उडिसा और तमिलनाडु के रेस्क्युअर्स को कम्युनिकेशन का प्रशिक्षण दिया जा रहा हैं।
प्रथम एनडीआपएफ के कमाण्डेंट आलोक कुमार सिंह ने इस संबंध में कहा है की कम्युनिकेशन की एचएफ प्रणाली बहुत ही सरल, मजबूत और आपदाओं से उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए एक अत्यधिक विश्वसनीय प्रणाली हैं। अतः इस प्रकार के उपकरणों का प्रयोग आपदाओं में बड़े स्तर पर करना चाहिए।
एनडीआरएफ के पास अभी आसानी से स्थापित होने वाले रेडियो सेट, एचएफ, वीएचएफ और यूएचएफ, पोर्टेबल क्यूडीए सेट हैं, जो एनडीआरएफ की टीमों को दूर-दराज के क्षेत्रों में आसानी से संपर्क स्थापित कर सकते हैं। रेस्क्युअर्स को दिए जा रहे प्रशिक्षण में वी सेट, इनमार सेट, इलैक्ट्रोनिक एक्सचेंज और वीओआईपी (वाईस ओवर इन्टरनेट प्रोटोकाल) टेलीफोन जैसे आधुनिक कम्युनिकेशन प्रणाली के उपकरण शामिल हैं।
एनडीआरएफ के महानिदेशक के अनुसार आपदा प्रबंधन में कम्युनिकेशन टेक्नोलोजी की अहम भूमिका है जो आपदा के दौरान डाटा और सूचना के आदान-प्रदान को बनाए रखने के लिए एक मात्र माध्यम हैं। उत्तराखण्ड, कश्मीर और उड़िसा में आई आपदाओं के अनुभव ने कम्युनिकेशन की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है और इसे पहले से और अधिक सुदृढ व विश्वसनीय बनाने की जरूरत है। प्राकृतिक आपदाएं मानव जीवन और उनके निवास को गम्भीर क्षति पहुंचाती हैं। अतः एनडीआरएफ के महानिदेशक द्वारा की गई पहल असम में आपदा प्रबंधन कार्यक्रमों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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