Sunday, June 23, 2024
Homeअन्यतलाक़ के खिलाफ तेलंगाना के क़ाज़ी कोर्ट ने उठाई आवाज़

तलाक़ के खिलाफ तेलंगाना के क़ाज़ी कोर्ट ने उठाई आवाज़

“तीन तलाक़” को जायज़ मानने की ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनवल लॉ बोर्ड की ज़िद के खिलाफ तेलंगाना के क़ाज़ी कोर्ट ने अवाज़ उठाई है। आंध्र प्रदेश में 1880 से क़ाज़ी एक्ट लागू है। इसके तहत मुसलमानों के शादी, तलाक़, मेहर जैसे निजी मामले इन्हीं क़ाज़ी अदालतों में तय होते हैं। काज़ी कोर्ट अब एक तरफ़ा दी जाने वाली तीन तलाक़ के खिलाफ़ खुल कर सामने आ रहे हैं। अंजुमन-ए-क़ाज़त के सदर मीर मुहम्मद कादर ने खुलासा किया है कि पिछले एक साल में उनके यहां 200 ऐसे मामले आएं जिनमें शौहर ने काज़ी कोर्ट में मेहर की रक़म जमा कराके क़ज़ी से निवेदन किया कि वो उनकी बीवी को मेहर की रक़म और तलाक़ का नोटिस भेज दें। कादर इस तरह एक तकरफ़ा दी जाने वाली तलाक़ को पूरी तरह ग़ैर इस्लामी मानते हैं। सिकंदकाबाद के चीफ़ काज़ी के मुताबिक उनके यहां पिछले कुछ महीनों में ही एक तरफ़ा तलाक़ के दर्जन भर मामले आए हैं। उन्होंने अपने इदारे में ऐसे मामलों में कोई भी दरख़ास्त तब तक लेने पर पाबंदी लगा दी है जब तक कि शौहर बीवी को साथ न लाए। उनके मुताबिक तलाक़ से पहले दोनों के बीच सुलह सफ़ाई की हर मुमकिन कोशिश होनी चाहिए। क़ाज़ी इकरामुद्दीन के मुताबिक एकतरफ़ा तलाक पर रोक से 15 फीसदी घर बर्बाद होने से बचाए जा सकते हैं। तेलंगाना के बहुत से क़ाज़ी एक तरफ़ा तीन तलाक़ को रोकने के लिए काज़ी एक्ट में ज़रूरी बदलाव चाहते हैं। ऐसे मामलों में बढ़ोत्तरी को देखते हुए क़ाजी यूसुफ़ुदद्दीन ने अल्पसंख्यक मामलों के विभाग की बैठक बुला कर इस बात पर ग़ौर करने की मांग की है कि तीन तलाक़ देने वालों के खिलाफ़ पुलिस कार्रवाई का रास्ता कैसे निकाला जाए। ये रिपोर्ट 22 अप्रैल के टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी है। इससे साफ़ ज़ाहिर है कि देश के हर हिस्से में एकतरफ़ा दी जाने वाली “तीन तलाक़” के खिलाफ़ माहौल है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी सुप्रीम कोर्ट मे अपना पक्ष रखने से पहले इन तमाम मामलों पर भी ग़ौर करना चाहिए।    

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments