चेत्र नवरात्रो मे चंहूओर माता दूर्गा के नो रूपो की स्तूती

चेत्र नवरात्रो मे चंहूओर माता दूर्गा के नो रूपो की स्त्ूाती की जा रही है, व तरह तरह से भक्त माता रानी को मनाने के जतन कर रहे हे, इन नो दिनो मे हर कही भक्तजन माता के प्रसिद्ध स्थानो पर जाकर दर्शन कर पुन्य लाभ भी ले रहे हे। व क्षेत्र मे भी माता के चमत्कारी स्थान हे जहा पर भक्त जनो कि भारी भीड़ हो रही है।ऐसा ही एक स्थान मां नर्मदा तट खलघाट से खरगोन मार्ग पर 7 किमी कि दूरी पर ग्राम पानवा मे सातमात्रा माता का स्थान ।ग्राम पावना मे खरगोन मार्ग पर माता दुर्गा का अति प्राचिन चमत्कारी स्थान है। जहा पर स्नान दान करने से भक्तो को लाभ होता है।
पानवा वाली माता के नाम से प्रसिद्ध है
ग्राम पानवा के मंदिर मे मां सातमात्रा देवी कि पुजा होती है। मंा सातमात्रा का अति महत्वपूर्ण रमणीय स्थान बरबस ही भक्तो को अपनी ओर आकर्षित करता हे,खासकर चेत्र व शारदीय नवरात्रो मे यहा कि सुंदरता देखते ही बनती है। ग्राम पानवा का सातमात्रा देवी का मंदिर पानवा वाली मां के नाम से प्रसिद्ध है।
9 चमत्कारी कुंडो के पानी से करते है भक्त स्नान
नर्मदा नदी से दो किमी कि दुरी पर मां सातमात्रा के मंदिर मे अति प्राचिन प्राकृतिक जल स्त्रोतो से अनवरत पानी का बहाव होता है । मां के भक्तो के मन मे इन कुंडो से निकलने वाले पानी का बड़ा ही महत्व है। पहाड़ी से रिसकर यह पानी कुंड मे इकठ्ठा होता है जिससे भक्त स्नान करते है।ऐसी मान्यता है कि माता के स्थान पर जो भी भक्त आता है उसे इन कुंडो के पानी से स्नान करना होता है। यहा पर लकवा चर्मरोग बाहरी बाधा नजर आदी के मरीज आकर कुंड मे स्नान करते है। भक्त अपने मन मे आस्था लेकर आते है
सोमवार रात्री से ही लगता है मेला
माता के स्थान पर प्रति मंगलवार को बड़ी संख्या मे भक्तजन आते है ।यहा कि मान्यताओ के अनूसार जो भी किसी भी प्रकार कि परेशानी बाहरी बाधा लकवा आदी बिमारीयो से परेशान जो मरीज पहली बार यहा आते है उन्हे सोमवार कि रात्री मे ही यहा पहुचना होता है।सोमवार कि रात्री मे प्रति पहर मे उन्हे बार स्नाान करना होता है।
पहाड़ी के नीचे है स्थान
ग्राम पानवा मे नर्मदा नदी के किनारे से दो किंमी कि दुरी पर स्थित मां सातमात्रा का स्थान एक पहाड़ी के निचे स्थित है । मंदिर के ठिक सामने भेरू जी का भी मंदिर हे, जहा पर बड़े ही विशाल पत्थर पर भेरू जी कि मुर्ति बनी हुई है। भेरू जी की मुर्ति के पास मे भी एक कुंड है जहा पर भी भक्त स्नान करते है ।
लगता है मैला
ग्राम पानवा मे माता के मंदिर मे यु तो हमेशा ही दर्शनो के लिऐ भक्तो का आना जाना लगा रहता हे किंतू शारदीय व चैत्र के नवरात्रो मे इस स्थान की महिमा बड़ जाती हे,यहा पर भक्तो की भारी भीड़ लगी रहती हे,चैत्र व शारदिय नवरात्री के सोमवार मंगलवार को प्रतिवर्ष एक दिवसीय मैला लगता हे ,मैले मे भारी भीड़ उमड़ती हे।
मनोकामना पुरी होने पर उतारते हे मन्नत
ग्राम पानवा की माता के बारे कहा जाता हे कि माता का स्थान बहूत ही चमत्कारी हे,व अपने चमत्कारो से कई बार भक्तो को अपनी उपस्थिती को अहसास कराया हे,माता के इस स्थान पर यू तो हर एक मन्नत पूरी होती हे,खासकर पूत्र कि कामना लकवा के मरीज यहा पर चमत्कारी रूप से ठिक होत है भक्त अपनी परेशानी से छुटकारा पाने के लिऐ मन्नत लेते है अपनी मनोकामना पूरी होने पर भक्तो के द्वारा यहा हलवा चावल चुरमा आदी मंदिर परिसर मे ही बनाकर उसका भोग माता केा लगाया जाता है।
कई चमत्कार हुऐ माता के स्थान पर
ग्राम पानवा के निवासीयो का कहना है की माता के स्थान पर हमने कई चमत्कार देखे है।भक्त बिमारी से पिड़ीत अपने परिजनो को स्ट्रेचर व्हीलचेयर पर लाद के लाते हे ओर अपनी मन्नत अनूसार पांच या सात मंगलवार प्राकृतिक जल के कुंड मे स्नान करने से ही वे पुरी तरह से ठिक हो कर जाते है।
काई से फिसलकर घायल होते हे श्रृद्धालू
यु तो माता के मंदिर मे कोई बात कि कमी नही है किंतू मंदिर प्रबंधन कि कमी ओर लापरवाही से स्नान करने वाली जगह पर जल स्त्रोतो से बारह मास निकलने वाले पानी से माता कि पहाड़ी के पत्थरो पर काई जम चुकी है ।स्नान करते हुऐ कई भक्त काई की फिसलन मे फिसल जाते है।मां पानवा के भक्तजनो ने ग्राम पानवा की मंदिर समिति से मंदिर परिसर मे काई कि सफाई कराने कि मांग की है।

 

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