गांव की पगडंडी से बदतर हो गए नेशनल हाइवे के हालात

शाजापुर। नगर के मध्य से निकलने वाले नेशनल हाईवे की दुर्दशा अब अपनी चरम सीमा भी पार कर चुकी है। वर्तमान स्थिति के अनुसार हाईवे के हालात इतने गम्भीर हैं कि हाईवे का यह हिस्सा किसी दूरदराज के अविकसित गांव की पगडंडी से बदतर नजर आने लगा है। जिम्मेदारों की अनदेखी, उपेक्षा, निकम्मेपन व लापरवाही के चलते हाईवे पर हुए गहरे ओर खतरनाक गड्डों में फंसकर हाईवे से निकलने वाले वाहन चालकों को नुकसान के रूप में इसका अनचाहा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

हाईवे के सड़क निर्माण में जिम्मेदारों द्वारा कैसी लूट मचाई गई होगी उसका अंदाजा जिला मुख्यालय पर करीब 6 करोड़ रूपए की राशि से बनी नेशनल हाईवे की सड़क को देखकर आसानी से ही लगाया जा सकता है। सड़क के नाम की पूरी राशि खर्च हो चुकी है और सड़क बार-बार पेंचवर्क ओर मरम्मत के बावजूद वापस गड्डों में तब्दील हो चुकी है। हाईवे की इसी सड़क को लेकर तात्कालिन सत्तापक्ष को जमकर कौंसने और हर मोर्चे पर घेरने वाला विपक्ष जहां आज स्वयं सत्ता में आ चुका है और उसके जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी मौनव्रत धारण करके अपने कार्यकाल को संवारने की व्यवस्थाओं में जुट चुके हैं वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन के प्रमुख अधिकारी दिन में चार बार उक्त सड़क मार्ग से गुजरते हुए गड्डों के र्स्वगीक सुख को भोगने के बावजूद संबंधित पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

स्थिति यह है कि इन जिम्मेदारों की स्वार्थी चुप्पी का खामियाजा हाईवे पर सफर करने वाली स्थानीय और बाहरी जनता जमकर भूगत रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के चलते रविवार को एबी रोड़ पर हो रहे भारी गड्ढों में एक मिनी ट्रक का पहिया फंस गया। वाहन में खचाखच माल भरा होने के साथ गड्डों में पहिया फंसने से जहां हाईवे पर भारी जाम की स्थिति निर्मित हो गई वहीं वाहन चालक को किसी ओर की करनी का फल भूगतने के लिए खासी अनचाही परेशानी भी उठाना पड़ गई।

साहब कार्यालय चमका दिया तो सड़क क्यों नहीं चमका सकते….

इन दिनों जिलामुख्यालय से लेकर संभाग तक शाजापुर कलेक्टर कार्यालय की खुबसुरती ही चर्चा का विषय बनी हुई है। कलेक्टर कार्यालय के निर्माण के बाद पहली बार यदि किसी कलेक्टर ने जिला कार्यालय को खुबसुरत स्वरूप प्रदान करने की कोशिश की है तो वे वर्तमान कलेक्टर प्रमोद गुप्ता हैं, जिला कलेक्टर के इस सराहनीय प्रयास को शहरवासियों ने भी अपना समर्थन प्रदान किया है। लेकिन अपने कार्यालय को ग्रीन और क्लीन बनाने वाले कलेक्टर साहब जिस मार्ग से उस चमकदार स्थान तक पहुंचते हैं उसके खस्ताहाल से पूरी तरह वाकिफ होने के बावजूद उसके उद्धार के प्रति भारी उदासीनता बरती जाना उनके कार्यकाल की उपलब्धियों में एक भारी कमीं के रूप में देखा जा रहा है। शाजापुर के जागरूक शहरवासियों ने जिला कलेक्टर से व्यक्तिगत निवदेन किया है कि साहब जिस प्रकार आपने कलेक्टर कार्यालय को चमकाया है उसी तरह व्यक्तिगत रूचि लेकर हाईवे की इस राष्ट्रस्तरीय धरोहर के हिस्से को भी चमकाने की पहल कर दो।

आए दिन लोग होते हैं दुर्घटनाओं का शिकार

हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को आए दिन अनचाही दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ता है। गहरे और खतरनाक गड्डों के चलते हाईवे की सड़क गांव की पगडंडी से बूरी स्थिति में पहुंच चुकी है, जहां से गुजरने वाले भारी और छोटे वाहन हिलते-झूलते हुए निकलते हैं और अनेकों बार असंतुलित होकर पलटी खाते-खाते भी बचे हैं। इसके अलावा कई बार वाहनों के कबानी पत्ते टूट जाते हैं तो कई बार चलते वाहनों के पहिए तक गड्डों के कारण वाहन से अलग हो जाते हैं। इसके साथ ही गड्डों में से निकलने वाले गिट्टी और पत्थरों के टुकड़े वाहनों के पहिये से उछलकर अन्य राहगीरों को घायल भी कर चुके हैं। कुल मिलाकर यदि कहा जावे तो हाईवे का शहरी हिस्सा गड्डों एवं उसमें से उछलने वाले पत्थरों के कारण सफर कम हादसों का सफर अधिक बन चुका है।

जनहितैषीयों ने धारण किया मौन व्रत

खुद को जनता का हितेषी बताने वाले जनप्रतिनिधियों की चुप्पी और शासकीय कार्यों की मानिटरिंग करने वाले जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण नगर के लोगों को कई वर्षों से एबी रोड़ पर हो रहे खतरनाक गड्डों का दंश झेलना पड़ रहा है। इन दिनों बेमौसम बारिश में यह गड्डे और कीचड़ राहगीरों के लिए जहां परेशानी का कारण बन रहे हैं तो वहीं बारिश थमने के बाद एबी रोड़ से उड़ते धूल के गुबार परेशानी परोसने का काम करते नजर आएंगे। जिम्मेदारों की उदासिनता के कारण एबी रोड़ के गड्ढों को पता नहीं कौन से घटिया मटेरियल से भरने का काम किया जाता है कि वह एक पखवाड़े में ही अपना स्थान छोड़कर गड्डों के रूप में पहले से गहरी और खतरनाक मुसीबत पैदा कर देता है।

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