क्या राजधानी को प्रदूषण मुक्त होने के लिए सिर्फ ऑड-इवन फॉर्मूले की ज़रूरत है !

दिल्ली में चलते ऑड- इवन योजना से तो सब वाकिफ ही है। मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल ने प्रदूषण से निजात पाने के लिए जनवरी 2016 को इस योजना की शुरुआत करी थी और ये योजना काफी हद तक सफल भी रही इसी सफलता को ध्यान में रखकर एक बार फिर से इसकी शुरुआत हुई 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक के लिए। एक बार फिर ये योजना पूरी सफलता के साथ पूरी होती नज़र आ रही है। चालान के कारण लोग फॉर्मूले को अपना तो रहें है लेकिन इससे प्रदूषण का स्तर कम होता नज़र नहीं आ रहा।
देश में बढ़ते प्रदूषण की समस्या ऑड-इवन के नियम से खत्म नहीं होगी।  यदि ऐसा होता तो पिछले दिनों दिल्ली में प्रदूषण का स्तर न बढ़ता। सरकार को  प्रदूषण के कारणों पर गौर करना होगा।  इस बात को ध्यान में रखना होगा कि कौन सा ईंधन और तकनीक प्रयोग की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार ये ज्ञात है कि हर महीने 15 दिनों के लिए ऑड- इवन चरण अपनाया जाएगा लेकिन प्रदूषण रोकने के लिए सिर्फ ऑड- इवन फॉर्मूले के अलावा और भी दूसरे कारकों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है । क्योंकि गाडिओं के अलावा भी प्रदूषण के कई कारण है और  इन कारणों को अनदेखा करना दिल्ली की जनता के लिए हानी कारक साबित हो सकता है।
भलस्वा लैंडफिल साइट से लम्बे समय से उठता धुंआ लोगो को परेशानिओ को बड़ा रहा है , इससे कई प्रकार की बीमारियां फ़ैल रहीं है।  लेकिन दिल्ली सरकार और नगर निगम अभी तक इस समस्या से बचने के लिए ना तो कोई उपाय ढूंढ पा रही और ना ही कोई कोशिश करती नज़र आ रही।
दिल्ली से प्रदूषण हटाने के लिए ऑड इवन योजना के साथ साथ इस तरह की चीज़ों पर भी ध्यान देना ज़रूरी है। फिलहाल तो दिल्ली सरकार का पूरा फोकस दिल्ली के ट्रैफिक और उससे होने वाले प्रदूषण पर है।
लैंडफिलों की बुरी हालत की वजह से हवा में प्रदूषण फ़ैल रहा है और प्रदूषित हवा और पानी लोगों की बिमारिओं को बड़ा रही है। इसको रोकने के लिए जिम्मेदारों की तरफ से  कोई कदम नहीं उठाए जा रहे।
यह हालात तब हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2002 में ही लैंडफिल साइट को बंद करने के  आदेश दे दिए थे।  इसके बावजूद भी लगातार इसका उपयोग किया जा रहा है। अब इसका खामियाज़ा आस पास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
राजधानी में कई जगह ऐसे इंडस्ट्रियल एरियाज है जो रिहाइश इलाको के पास है, फेक्टेरिओं का धुंआ पूरी तरह हवा में मिल जाता है और इसे कई प्रकार की साँस और फेफड़ों से जुडी बीमारियां फ़ैल रही है।  आज जो इंसान सिगरेट शराब नहीं भी पिता  है वो भी किडनी फेलियर जैसी खतरनाक बिमारिओं से ग्रस्त है।  क्या कारण है की ये बीमारियां इतनी ज़्यादा फ़ैल रही है ? इसका एक कारण फेक्टरिओं से निकलता धुंआ भी है जी हवा में पूरी तरह फ़ैल जाता है और लोगों को बीमार कर देता है।
कुछ पैसे की बचत के लिए इन फेक्टेरिओं के मालिक एडवांस्ड पॉल्यूशन गैजेट्स का इस्तेमाल नहीं करते और भारी मात्रा में ज़हरीली गैसें वायु को प्रदूषित करती है।
यह बात तो हुई इंडस्ट्रियल एरियाज की अब अगर बात करें दिल्ली की सड़कों की तो जगह जगह गढ्ढे, धूल, मिटटी , रेत तो जैसे दिल्ली वालों के लिए एक फैशन सा बन गया है। इससे लोगों को स्किन इन्फेक्शन, साँस की परेशानी होने का खतरा हो जाता है। सड़कों पर जगह जगह कूड़ा जलता नज़र आता है , लेकिन अभी तक  दिल्ली सरकार की कोई ऐसी योजना नहीं है जिससे दिल्ली वालों को ऐसी समस्या से छुटकारा मिल सके।

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