कांगेस बडे बदलाव की ओर

अरूण पाण्डेय
नई दिल्ली ।दिल्ली विधानसभ के चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांगेस, केन्द्रीय नेतृत्व में परिवर्तन कर पार्टी को उसे नया रूप दिये जाने का प्रयास शुरू कर दिया है। जिसके तहत मोतीलाल बोरा व दिग्विजय सिंह को नयी जिम्मेदारी मिल सकती है।सचिन पायलट , ज्योतिरादित्य सिंधिया व दीपेन्द्र हुडृडा व अरूण यादव को केन्द्रीय कमेटी में जगह मिल सकती है। कई प्रवक्ताओं की छुटटी हो सकती है इस बात का संकेत रणदीप सुरजेवाला को कुछ दिन पहले प्रवक्ता बनाकर पार्टी ने कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मीडिया से बेहतर तालमेल ही प्रवक्ता की जिम्मेदारी होती है ताकि पार्टी की नीतियां उनके पास तक पहुंच सके लेकिन मीडिया विंग पूरी तरह से विफल रही है इसे संजीवनी देने की जरूरत है और युवा ही दे सकता हैे इस बात का संकेत नेतृत्व देने लगा है।
        पिछले पन्द्रह सालों से दिल्ली की सियासत पर काबिज रहने वाले शीला दीक्षित व हरियाणा के मुख्यमं़त्री के दिन भी लौट रहें है।पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय में उनको अब लगातार देखा जा रहा है। पिछली बार कांग्रेस ने दिल्ली में शीला दीक्षित के नेतृत्व में चुनाव लडा था और जे पी अग्रवाल प्रदेश अघ्यक्ष थे । उस समय आरोप लगा था कि उनकी वजह से चुनाव हार गयी । लेकिन तब कांग्रेस बेहतर स्थित में थी बजाय आज के , उनकी उपस्थित इसी बात को केन्द्रित कर रही  यहां यह बता देना उचित होगा कि इस चुनाव में अपना प्रभाव दिखाने वाले प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली , राष्टीय महासचिव अजय माकन व दिल्ली के प्रभारी पी सी चाको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाय कि नही इसपर मंथन चल रहा है। केन्द्रीय नेतृत्व जानता है कि कांग्रेस की धार अब दिल्ली में कुंद हो रही है, उसे संजीवनी देने का काम चल रहा है। मगर कैसे इसके लिये कवायद जारी है। थी।दूसरी तरफ दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भूपेन्द्र सिंह हुडडा को भी केन्द्रीय नेतृत्व में स्थान मिलना तय है । उनकी ही पसंद का हरियाणा में प्रदेश अध्यक्ष में होगा इस बात पर भी केन्द्र लगभग सहमत हो गया है।
      कांग्रेस के दिल्ली प्रदेशईकाई की बात की जाय तो केन्द्रीय नेतृत्व इस बात के लिये अब तैयार हो गया है कि कांग्रेस की कमान अब उस नेता को दी जाय जिसकी पहचान जमीनी हो और लोगों के बीच का रहने वाला हो एैसा लगे , पार्टी को लगता है कि कांग्रेस के जो विधायक पिछले कुछ सालों में रहे उनकी जमीनी पकड विधायक बनने से पहले तक ठीक थी लेकिन विधायक बनने के बाद ठीक नही रही , ज्यादातर विधायक तो क्षेत्र में ही नही गये और जो दरवाजे पर आये उनसे सलीके से बात भी नही की, जिसके कारण यह हालत हुई । पार्टी अब यह मानने लगी है कि इस तरह से नही चलेगा और किसी नये नेता को पार्टी की कमान दी जायेगी, जिससे पार्टी के नेतृत्व में नयापन आ सके और पुराने नेताओं से ध्यान हट सके।
         जहां तक राष्टीय नेतृत्व की बात है तो हमेशा से एक ही मांग रही है कि प्रियंका गांधी को चुनाव की कमान दी जाय , लेकिन कांग्रेस के केन्दीय नेतृत्व ने इस मांग को नही माना । दो बार के विधानसभा नतीजे दिल्ली में  प्रभावित हो चुके है और देश के लोकसभा चुनाव में भी इस बात का प्रभाव देखा जा चुका है। पिछली बार पाटी्र ने इस तरह की किसी भी संभावना से इंकार किया था लेकिन अब लगता है दिल्ली की करारी हार के बाद इस मुदृदे पर विचार करना शुरू कर दिया है। खबर यह भी है कि बिहार चुनाव की कमान प्रियंका को दी जा सकती है।

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