आप का अतिक्रमण: पहले दौर से योगेन्द्र , प्रशांत ,आनंद व अनिल बाहर

नईदिल्ली। आज आम आदमी पार्टी के दिल्ली गुडगांव के बीच स्थित कापसहेडा कार्यालय मेें राष्ट्रीय कार्यकारणी की एक बैठक हुई जिसमे योगेन्द्र यादव , आनद कुमार , प्रशांत भूषण व अनिल झा को पार्टी की कार्यकारणी समिति से बाहर का रास्ता दिखाने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया । उन्हें निकालने के लिये लगभग दो सौ सैंतालिस वोट पडे। निकाले गये लोगों ने आरोप लगाया कि 167 वोट पहले से ही डाले जा चुके थे और यह वह लोग है जो केजरीवाल गुट द्वारा जबरन पार्टी पर प्रत्यारोपित किये गये थे और कार्यकारणी के सदस्य नही थे।
इससे पूर्व आज सुबह जब कार्यकारणी की बैठक शुरू हुई तो पहले ही योगेन्द्र यादव से धक्का मुक्की कर यह स्क्रिट कैसी होगी इस बात का संकेत दे दिया गया। इसके बाद अंदर जाने से पहले सभी के मोबाइल लेकर जमा करा लिये गये ताकि कोई भी रिकार्डिग न कर सके । मीडिया केा भी अंदर नही जाने दिया गया और अंदर एैसे लोगों को देखा जाय जो कभी इससे पहले आम आदमी पार्टी के कार्यालय या सभाओं में दिखे ही नही । बैठक में लोकपाल रामदास को भीआने से मना किया गया और सबकुछ केजरीवाल ने अपने पास ही रखा।जिसे लेकर कुछ अन्य नेता व सदस्य नाराज हो गये और कहा कि यह पार्टी में लोकतंत्र की हत्या हो रही है और यह कहते हुए बाहर चले गये। जब केजरीवाल अपना अध्यक्षीय भाषण दे रहे थे तो एक कार्यकारणी सदस्य रमजान ने अपनी बातों को कहना चाहा तो उन्हें मारपीट कर चुप करा दिया गया । उसके बाद जब केजरी वाल ने कहा कि चारों लोगों के खिलाफ क्या करना है यह आप जाने,इसके बाद वह अपना दायित्व गोपाल राय को सौंप कर चले गये।उसके बाद आरोपित लोगों को न तो बोलने दिया गया और न ही उनकी कोई बात सुनी गयी। आंमत्रित लोगों ने दबाब बनाकर जबरन आरोपियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
सम्पूर्ण बैठक पर नजर डाली जाय तो पूरे कार्यकारणी में लगभग दो सौ सदस्य है। जिसमें से शाजिया इल्मी, मेधा पाटकर जैसे पैंतालिस लोग छोडकर चले गये।दूर के लगभग पचास के आसपास सदस्य नही आ सके। यह कहा जा सकता है कि इस बैठक में सिर्फ सौ लोग ही होने थे लेकिन दो सौ लोगों को क्यों बुलाया गया इस पर सभी चैनलों का बाजार गर्म है। आरोपित लोगो ंकी माने तो अंदर बैठक में लात धूंसे भी चले और वह उन लोगों ने किये जिन्हें जनता ने चुनकर विधायक बनाया है। इसके अलावा एक मामला यह भी है कि अब तक जो नवीन जयहिंद योगेन्द्र को लेकर दबाब बना रहे थे और अपशब्द बोल रहे थे वह इतनी भारी संख्या में लोगों को रोहतक से लेकर क्यों आये थे जिसमें से काफी लोगों ने माहौल को गरमाया। क्या यह सोची समझी रणनीति थी।
क्या था इंतजाम
इससे पहले योगेंद्र बैठक में पार्टी के कई सदस्यों को शामिल न होने देने के विरोध में बाहर धरने पर बैठे थे, लेकिन बाद में उन्होंने धरना खत्म कर दिया है. योगेंद्र यादव के साथ धक्का-मुक्की भी हुई थी. इस बैठक में योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निकालने पर फैसला हो सकता है. इस बैठक की अध्यक्षता कुमार विश्वास कर रहे हैं. बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगी। केजरीवाल वोटिंग से दूर रहेंगे. 11 विधायकों के पास वोटिंग का अधिकार है. मीटिंग की लोकेशन के आसपास पुलिस ने किसी भी अनहोनी की आशंका को देखते हुए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं.
क्या था संकेत
बैठक शुरू होने से पहले ही बाहर हंगामा शुरू हो गया था. गद्दारों को बाहर निकालो के नारे लगाए जा रहे हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में यादव और भूषण को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बर्खास्त करने और पार्टी से निष्काशित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा. पार्टी के ज्यादातर नेता योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को बाहर का रास्ता दिखाकर यह संदेश देना चाहते हैं कि पार्टी में बगावत बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे वो कितने ही बड़े कद का नेता क्यों न हो. अरविंद केजरीवाल के समर्थक नेताओं का आरोप है कि योगेंद्र और प्रशांत बार-बार पार्टी के संयोजक के खिलाफ साजिश रच रहे थे. इसके अलावा दिल्ली चुनाव में पार्टी की हार सुनिश्चित करने का काम कर रहे थे. ये दोनों ही गतिविधियां पार्टी विरोधी हैं. ऐसे में इन्हें पार्टी से हटाया जाए. बैठक में सबूत के तौर पर कई ईमेल और ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी रखा जाएगा. उधर बागियों के गुट की तैयारी भी कम नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय परिषद की बैठक के लिए रणनीति बन गई है. योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण केजरीवाल को कड़ी टक्कर देने के मूड से मैदान में उतर रहे हैं. बैठक से पहले दोनों ने पार्टी को चिट्टी लिखकर कई मांगों को सामने रखा.
क्या हुआ था शुक्रवार को
प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने प्रेस कांफ्रेंस करके जिस तरह तरह केजरीवाल और उनके गुट पर हमला बोला, उससे यह साफ हो गया कि केजरीवाल गुट के साथ उनकी सुलह की सभी संभावनाएं खत्म हो चुकी हैं. सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय परिषद के कुल 350 सदस्यों में से 100 सदस्यों का ही समर्थन योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के पास है. साफ हैं आंकड़े केजरीवाल के पक्ष में दिख रहे हैं. लिहाजा दोनों पुराने साथी और पार्टी के संस्थापक सदस्यों का पत्ता साफ हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक प्रबल संभावना है कि दोनों को पार्टी से बाहर निकाल दिया जाए. लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल ये भी खड़ा हुआ है जिस तरह से दोनों खेमों के बीच खटास सामने आई है तो क्या राष्ट्रीय परिषद की बैठक शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो पाएगी.
सामने आया केजरीवाल का एक और स्टिंग
राष्ट्रीय परिषद की बैठक से एक दिन पहले शुक्रवार को योगेंद्र और प्रशांत भूषण समर्थक गुट के माने जाने वाले बिहार के नेता उमेश सिंह ने केजरीवाल का एक ऑडियो टेप जारी कर हड़कंप मचा दिया. इस टेप में केजरीवाल आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते सुने गए. इतना ही नहीं, उस टेप में केजरीवाल आम आदमी पार्टी को तोड़कर एक नया दल बनाने की बात भी करते सुने गए. डैमेज का आभास होते ही केजरीवाल गुट बचाव में उतर आया, लेकिन उनकी सफाई लोगों को हजम नहीं हो रही है.
अलग पार्टी बना सकते हैं भूषण और यादव
खबर है कि आम आदमी पार्टी से बाहर होने के बाद प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं. सूत्रों की मानें तो दोनों नेताओं ने अपनी पार्टी बनाने की तैयारी तभी शुरू कर दी थी, जब उन्होंने बगावत शुरू की थी.

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