अपने विधायको को बीजेपी के नाम से “आप ” ने ही किये थे फोन ?

पत्रिका ब्यूरो। 
दिल्ली। दिल्ली के 2013 मे चुनाव जीतकर आने वाले विधायको को बीजेपी का नाम लेकर पैसे देने की ऑफिस करने वाले फ़ोन भी क्या ” आप ” के ही नेताओं ने करवाये थे ? क्या आम आदमी पार्टी अपने विधायकों ऐसे फ़ोन कर उन पर नजर रख रही थी ? यह सवाल  आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक राजेश गर्ग के एक और आरोप से खड़ा हुआ है। 
राजेश गर्ग के कहना है की 2103 में सरकार बनाने की कोशिशों के तहर चल रही जोड़ तोड़ करने के प्रयासों के तहत जिन विधायको को बीजेपी का नाम लेकर फोन आये वे ज्यादातर “आप ” के ही  नेताओं ने करवाये थे।  
राजेश गर्ग ने कहा की उनके पास भी अरुण जेटली के ऑफिस का हवाला देकर फोन आया  जिसमें उन्हें 10 करोड़ रुपये देने का लालच दिया और बात न मानने पर धमकी भी थी थे।     बकौल राजेश गर्ग उन्होंने यह बात अरविन्द केजरीवाल सहित कई विधायको और नेताओं को बताई तो अरविन्द केजरीवाल ने मुस्करा कर बात को टाल दिया। लेकिन उन्होंने इसकी लिखित शिकायत राजेश गर्ग ने प्रशांत विहार थाना पुलिस को दी थे। पुलिस ने  जांच के बाद फोन करने वाले एक शख्स को पकड़ भी लिया। लेकिन उन्हें हैरत तब हुए जब उनके पास अरविन्द केजरीवाल के सहायक विभव और संजय सिंह का  फ़ोन की उस लडके को छुड़वाओ।पुलिस उसे परेसान कर रही है।  बकौल  गर्ग तब उन्हें पता लगा की इस तरह के फ़ोन “आप ” की और से ही किये जा रहे थे।  
राजेश गर्ग ने इस बात से इनका नहीं किया की उस वक्त बीजेपी ने  ऐसे प्रयास ने किये हो।  लेकिन यह भी सच्ची है की ऐसे फ़ोन आम आदमी पार्टी ने भी करवाये थे।  केजरीवाल में नैतिकता नहीं बची है। 
क्या आम आदमी पार्टी अपने विधायकों को चैक कर रही थे ” इस सवाल पर राजेश गर्ग कहतें है की यह सही भी हो तो क्या अरविन्द को दूसरी पार्टी को बदनाम करने का हक़ है ? क्या उसके बाद अरविन्द केजरीवाल को  स्पष्ट नहीं करना चाहिए था की उनके विधायक सच्चाई की कसोटी पर खरे है ? 
गौरतलब है की ऐसे है आरोप शालीमार बाग से “आप ”  विधायक वंदना कुमारी ने भी लगाये थे की संजय शाह नाम के एक शख्स ने उन्हें ऑफिस में आकर धमकी दे की आम आदमी पार्टी को छोड़ दो।  बंदना को पैसे और पद  का लालच भी दिया था।  इसकी सीसीटीवी फुटेज भी मिली थे।  बाद में सामने निकालकर सामने आया की संजय शाह नाम का यह शख्स भी आम आदमी पार्टी का प्रमुख वालेंटियर है।  बाद में यह मामला भी रफा दफा हो गया।  
” आप ”  के सूत्रों की मानें तो अपने ही विधायकों को इस तरह फोन कर रुपयों को लालच देने की पीछे दो मकसद थे।  पहला तो अपने विधाकों को परख रहे थे।  दूसरा बीजेपी पर दबाब बनाकर विधाकों को तोड़ने के कथित प्रयासों को रोकना।  साथ ही जनता की सहनुभूति भी मिलाती। हालांकि “आप ” को यह भी डर था की दिल्ली की कुस्री छोड़ने के बाद हुयी किरकिरी के बाद कहीं “आप ” चुनाव न हार जाये। लिहाज़ा वह सरकार भी बनाना चाहती थे।  
बहरहाल राजेश गर्ग के इस खुलासे के बाद “आप ” फिर के नए आरोप से घिर गयी है।  
 

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