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पतंजलि में दो योग धाराओं का महासंगम: बाबा रामदेव और डॉ. सुरेश महाराज ने दिया ‘सशक्त भारत’ का मंत्र

पतंजलि में दो योग धाराओं का महासंगम: बाबा रामदेव और डॉ. सुरेश महाराज ने दिया 'सशक्त भारत' का मंत्र

हरिद्वार। पतंजलि वेलनेस में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब आनंद योग के प्रणेता डॉ. सुरेश जी महाराज और योग गुरु बाबा रामदेव एक ही मंच पर साथ आए। इस ऐतिहासिक मिलन के दौरान बाबा रामदेव ने डॉ. सुरेश महाराज का भव्य स्वागत किया, वहीं महाराज जी ने उन्हें ‘आनंद योग’ और ‘गीता सुधा’ जैसे आध्यात्मिक ग्रंथ भेंट किए। दोनों गुरुओं ने इस भेंट को केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि ज्ञान और परंपराओं के साझा संकल्प का एक महत्वपूर्ण संदेश बताया, जो समाज को नई दिशा प्रदान करेगा।

कार्यक्रम के मुख्य संबोधन में डॉ. सुरेश भैयाजी ने युवाओं को ‘लक्ष्य-केन्द्रित जीवन’ जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता पाने के लिए लक्ष्य का स्पष्ट होना अनिवार्य है; युवाओं को चाहिए कि वे अपने लक्ष्य को लिखकर अपने पास रखें और गुरु के मार्गदर्शन व पूर्ण आत्मविश्वास के साथ उसे प्राप्त करने में जुट जाएं। उनके अनुसार, जब युवाओं का निशाना अपने लक्ष्य पर सटीक होता है, तभी एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने भौतिक सफलता के साथ-साथ आत्मिक उन्नति और सकारात्मक सोच को भी जीवन का आधार बताया।

वहीं, बाबा रामदेव ने इस मिलन को राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि आज के दौर में शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और आत्मिक संतुलन अत्यंत आवश्यक है। पतंजलि योग और आनंद योग का यह समन्वय आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुशासन और ध्यान का नया मार्ग प्रशस्त करेगा। आयोजन के अंत में वहाँ मौजूद बड़ी संख्या में युवाओं ने अपने जीवन में अनुशासन अपनाने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम स्पष्ट कर गया कि सही मार्गदर्शन और समर्पण से ही युवा अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सकते हैं।

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