नई दिल्ली (अपनी पत्रिका) : किसान संघर्ष समिति द्वारा आयोजित 340वीं किसान पंचायत में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने कृषि मंत्री के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें किसानों की आय 8 गुना बढ़ने की बात कही गई थी। डॉ. सुनीलम ने कहा कि असलियत में किसानों की आय आधी रह गई है। पंचायत में हरियाणा में गेहूं खरीद हेतु लागू बायोमेट्रिक सिस्टम का विरोध किया गया और पंजाब में बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसलों के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग का पुरजोर समर्थन किया गया। देशभर के किसान नेताओं ने एकजुटता दिखाते हुए सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
पंचायत के दौरान विभिन्न राज्यों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। पंजाब में 1.25 लाख एकड़ फसल की बर्बादी पर चिंता जताते हुए कर्ज माफी की मांग की गई, वहीं महाराष्ट्र में तेंदुओं के आतंक और विदर्भ में किसानों की आत्महत्याओं पर नीति बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा बिजली विभाग की लापरवाही से फसल जलने पर लागत का डेढ़ गुना मुआवजा देने, जंगली जानवरों व छुट्टा पशुओं से सुरक्षा हेतु राष्ट्रीय कानून बनाने और गेहूं के साथ-साथ चना व मसूर की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग उठाई गई।
संगठन ने भविष्य की रणनीति साझा करते हुए घोषणा की कि आगामी 19 अप्रैल को अमरोहा (उत्तर प्रदेश) और 7 जून को सीधी (मध्य प्रदेश) में विशाल ‘किसान मजदूर पंचायत’ आयोजित की जाएगी। पंचायत में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, अनूपपुर और सिंगरौली जैसे क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, प्राकृतिक संसाधनों की लूट और गेहूं खरीद केंद्रों पर बारदाने की कमी जैसे तकनीकी मुद्दों पर भी आक्रोश व्यक्त किया गया। इस बैठक का संचालन रामस्वरूप मंत्री ने किया, जिसमें हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ किसान नेताओं ने भाग लिया।
