दिल्ली की गलियों में अक्सर दोस्ती और मोहब्बत की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं। लेकिन हर्ष विहार की यह वारदात दोस्ती के सबसे काले चेहरे को उजागर करती है। बचपन के साथी, जो हमेशा साथ देखे जाते थे, अब एक लाश और एक हत्यारे में बदल गए हैं।
मामूली बहस से खूनी अंजाम
पुलिस की जांच में सामने आया कि मृतक युवक का आरोपी की बहन से अफेयर था। इस रिश्ते को लेकर आरोपी कई दिनों से अंदर ही अंदर खौल रहा था। उसे लगता था कि यह रिश्ता उसके परिवार की “इज़्ज़त” पर दाग है।
रात को दोनों की मुलाक़ात हुई। पहले तो बहस हुई, लेकिन फिर गुस्सा काबू से बाहर हो गया। आरोपी ने जेब से चाकू निकाला और वार पर वार करता चला गया। पीड़ित चीखता रहा, लेकिन मिनटों में सब ख़ामोश हो गया।
गली में फैली दहशत
मौके पर मौजूद एक शख्स ने बताया:
“हमने चीखें सुनीं, बाहर भागे तो देखा कि लड़का ज़मीन पर पड़ा था, पूरा खून से लथपथ। पास ही उसका दोस्त खड़ा था, हाथ में चाकू।”
मोहल्ले के लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे थे कि जो लड़के बचपन से साथ खेलते आए, उनमें से एक ने दूसरे को इतनी बेरहमी से मार डाला।
मां-बाप का रोना और बहन की चुप्पी
मृतक के घर मातम पसरा है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वो बस इतना कह रही हैं:
“जिसे घर का बेटा समझा था, उसी ने मेरा असली बेटा छीन लिया।”
वहीं आरोपी की बहन सदमे में है। वह किसी से बात नहीं कर पा रही। पुलिस ने उसे भरोसा दिलाया है कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं, लेकिन अंदर ही अंदर वह खुद को इस वारदात की वजह मान रही है।
पुलिस ने दबोचा आरोपी
हत्या के बाद आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस ने उसे पकड़ लिया। पूछताछ में उसने साफ कहा कि यह हत्या उसने “इज़्ज़त” बचाने के लिए की। पुलिस अब जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे और लोग तो शामिल नहीं थे।
इज़्ज़त के नाम पर कितनी और जानें?
यह वारदात सिर्फ एक मोहल्ले की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सोच पर सवाल उठाती है। क्या प्यार और रिश्तों की कीमत आज भी खून से चुकानी पड़ती है?
विशेषज्ञों का कहना है कि “ऑनर किलिंग” या रिश्तों को लेकर हिंसा सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि दिल्ली जैसे महानगरों में भी गहरी जड़ें जमा चुकी है।
दिल्ली में बढ़ता अपराध
पुलिस आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में रिश्तों और परिवारिक विवादों से जुड़ी हत्याओं के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। दोस्ती, प्यार और शादी जैसे रिश्ते कई बार हिंसा और खून का कारण बन जाते हैं।
हर्ष विहार का यह मामला एक और काली मिसाल बन गया है।
नतीजा – दोस्ती या दुश्मनी?
इस वारदात ने सबको हिला दिया है। लोग अब यही कह रहे हैं कि आजकल दोस्ती भी भरोसे का रिश्ता नहीं रही। जहां ज़रा सा शक, गुस्सा और तंग सोच दोस्त को हत्यारा बना सकती है।
