मुहीम मुक्ति के माध्यम की

राजेंद्र स्वामी

प्रकाश पुंज सेवा समिति


देशभर में कोरोना संक्रमण का असर जीवन पर ही नहीं ,मौत के बाद अंतिम संस्कार पर भी पड़ा है। इस समय कितने ही लोगों की अस्थियां शमशान घाट में पड़ी विसर्जन का इन्तजार कर रही है, कि कब ये मोक्ष दायनी माँ गंगा में प्रवाहित हो और उनकी आत्मा को शान्ति मिले ,लेकिन इस कोरोना महामारी के कारण  हुए लॉक डाउन में यह कार्य भी बहुत मुश्किल हो गया है। कुछ लोग गरीबी की वजह से अस्थियां प्रवाहित नहीं कर पा रहे हैं तो कई लोग कोरोना के डर से अस्थियां लेने नहीं आ रहे हैं। ऐसे में अकाल मौत हुए लोगों को मोक्ष की प्राप्ति कैसे हो ?

आस्थावान लोगों और मृतक के परिजनों की इस चिंता को सामाजिक संस्था प्रकाश पुंज सेवा समिति ने अपने सर पर लिया हुआ है। वर्ष 2014 से संस्थापक अध्यक्ष  पंडित विशाल शास्त्री के सरक्षण में  यह पुनीत कार्य कर रही “प्रकाश पुंज सेवा समिति ” हर माह हरिद्वार जाकर लावारिस अस्थियों को माँ गंगा में विधिवत विसर्जन करती आ रही है ।पहले जहाँ केवल 100 -50 अस्थियां ही संस्था को प्राप्त होती थी लेकिन इस कोरोना काल में अस्थियों की संख्या अब हज़ारों तक में पहुंच गयी है ।

हालत ऐसे है कि शमशान घाटों पर अस्थियों को बोरों में भरकर रखा जा रहा है। विगत दिनों में ऐसे ही 100 से ज्यादा अस्थियों को प्रकाश पुंज सेवा समिति ने पूर्ण वैदिक विधि -विधान के साथ मोक्ष दायनी माँ गंगा में विसर्जन किया जा रहा है। समिति के संस्थापक अध्यक्ष पंडित विशाल शास्त्री ,कोषाध्यक्ष श्रीमती रश्मि जोशी , महासचिव निशांत सिसोदिया , उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष रोहित चौधरी ,कोषाध्यक्ष श्रीमती सीमा सैनी ने ऐसे तमाम लावारिस अस्थियों को अपना मानते हुए परिवार के सदस्य की तरह उनकी मोक्ष की चिंता करते है। यह अस्थियां या तो लावारिस लोगों की होती है या फिर उन  गरीब लोगों की होती है जिनके परिजनों के लिए अंतिम संस्कार का खर्च उठाना  बहुत मुश्किल होता है।

हिन्दू धर्म में दाह संस्कार के बाद अंतिम संस्कार का क्या महत्त्व होता है यह हम सब हिन्दू जानतें है। हमारी देश की मान्यता के अनुसार दाह संस्कार के बाद यदि किसी का अंतिम संस्कार नहीं होता तो उसकी आत्मा युगों युगों तक भटकती है लेकिन यदि उस व्यक्ति की अस्थियों का विसर्जन माँ गंगा में हो जाये तो उसे सभी पापों से मुक्ति भी मिल जाती है।

प्रकाश पुंज सेवा समिति ऐसी ही अज्ञात अस्थियों की मुक्ति का माध्यम बना हुआ है। प्रकाश पुंज के इस पुनीत कार्य से अब लगातार सेवा भावी और श्रदालु निरंतर जुड़ रहे हैं। प्रकाश पुंज की इस सेवा भावना को हमारा शत शात प्रणाम।

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