दिल्ली में बारिश का कहर: गलियां डूबीं, यमुना उफान पर

दिल्ली में बारिश का कहर: गलियां डूबीं, यमुना उफान पर

दिल्ली, जिसे लोग देश की धड़कन कहते हैं, इन दिनों बारिश के शिकंजे में जकड़ी हुई है। आसमान से लगातार बरसते पानी ने शहर की रफ्तार तोड़ दी है। कभी जिन सड़कों पर गाड़ियां दौड़ा करती थीं, वहां अब लोग नाव जैसी चीज़ें ढूंढ रहे हैं। गलियां पानी से लबालब हैं और हर कोई परेशान है।

गलियों में तालाब जैसे हालात

राजधानी के निचले इलाकों का हाल सबसे ज्यादा खराब है। कहीं घरों में पानी घुस गया है तो कहीं दुकानें तालाब में बदल गई हैं। लोग चौकी और बिस्तर ऊंचाई पर रखकर सो रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। ऑफिस जाने वाले लोग ट्रैफिक और पानी में घंटों फंसे रहते हैं।

शास्त्री पार्क के रहने वाले राजेश कहते हैं – “घर से निकलना सजा जैसा लग रहा है। गली में घुटनों तक पानी है, जूते पहनकर निकलो तो भी भीग ही जाते हैं।”

यमुना का उफान

दिल्ली की सबसे बड़ी चिंता यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर है। नदी किनारे बसे परिवारों के लिए हालात बेहद खतरनाक हो चुके हैं। कई लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जा चुके हैं।

करीब 65 साल की सुनीता देवी कहती हैं – “हमने सारी जिंदगी यहीं बिताई, लेकिन ऐसा पानी पहले कभी नहीं देखा। डर लगता है कि कहीं घर ही न डूब जाए।”

रोज़मर्रा की जिंदगी पर असर

बारिश ने लोगों की दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। दूध, सब्ज़ियां और जरूरी सामान महंगा हो गया है। कई जगह दुकानों में पानी घुसने से सामान खराब हो गया।

ऑटो चलाने वाले मोहम्मद इकबाल बताते हैं – “सड़क पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है। लोग सवारी करना चाहते भी हैं तो डरते हैं कि ऑटो पानी में बंद न हो जाए।”

प्रशासन की कोशिशें और नाराज़गी

दिल्ली सरकार और नगर निगम की टीमें पानी निकालने में लगी हैं। जगह-जगह पंप लगाए गए हैं, ट्रैफिक पुलिस चौक-चौराहों पर खड़ी है। लेकिन हकीकत यह है कि इतने बड़े शहर में ये इंतज़ाम ऊंट के मुंह में ज़ीरा साबित हो रहे हैं।

करावल नगर की सीमा कहती हैं – “हर साल यही हाल होता है। सरकारें वादे करती हैं लेकिन बारिश आते ही सब धरे रह जाते हैं। आखिर कब सुधरेगा ये शहर?”

सोशल मीडिया बना आईना

सोशल मीडिया पर दिल्ली की तस्वीरें और वीडियो छाए हुए हैं। कहीं बच्चे पानी में खेलते नजर आते हैं, तो कहीं गाड़ियां डूबी पड़ी हैं। एक तस्वीर में आदमी ट्यूब पर बैठकर सड़क पार करता दिखा, जिस पर कैप्शन था – “दिल्ली की नई वॉटर टैक्सी।”

कारोबार पर गहरा असर

बाजारों का हाल भी खराब है। चांदनी चौक, करोल बाग़ और सरोजिनी जैसे इलाकों में खरीदारों की भीड़ गायब है। दुकानदार मायूस हैं क्योंकि बिक्री आधी हो गई है। कई दुकानें पानी में डूबने की वजह से बंद करनी पड़ीं।

आगे क्या?

मौसम विभाग का कहना है कि बारिश का सिलसिला अभी थमेगा नहीं। आने वाले दिनों में और तेज़ बारिश हो सकती है। यानी दिल्ली वालों की मुश्किलें फिलहाल खत्म नहीं होंगी।

नतीजा

दिल्ली इन दिनों वाकई पानी-पानी हो चुकी है। गलियां नाले जैसी, सड़कें तालाब जैसी और यमुना उफान पर। लोग सिर्फ यही सोच रहे हैं कि आखिर कब दिल्ली बारिश से जूझने की बजाय राहत महसूस करेगी। सवाल वही है – योजनाएं तो बहुत बनीं, लेकिन असर कब दिखेगा?

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