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Rahul Gandhi : कांग्रेस के लिए बड़ा हथियार बनता राहुल गांधी की सांसदी जाना

By अपनी पत्रिका

March 25, 2023

सीएस राजपूत 

देश का इतिहास रहा है कि जब भी किसी नेता पर सत्ता ने शिकंजा कसा है उसे परेशान किया है वह उतना ही मजबूती से उभरा है। इमरजेंसी देश का सबसे बड़ा उदाहरण है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जितने भी नेताओं को जेल में डाला वे उतने ही मजबूत होकर उभरे और लोकनायक जयप्रकाश की अगुआई में हुए आंदोलन के बल पर लंबे समय तक जेल में तमाम यातनाएं झेलने के बाद १९७७ में जनता पार्टी की सरकार बनी। इस सरकार के संरक्षक तो जेपी थे पर मुख्य नेता मोरारजी देसाई, चरण सिंह, जगजीवन राम, चंद्रशेखर सिंह, मधु लिमये, जार्ज फर्नांडीज, मधु दंडवते आदि थे। मोरारजी देसाई सरकार में गृह मंत्री चरण सिंह ने तमाम समझाने के बावजूद इंदिरा गांधी को जेल में डाल दिया और उससे बड़ी गलती चरण सिंह ने इंदिरा गांधी के उकसावे में कांग्रेस की मदद से सरकार बना ली।

चरण सिंह की सरकार ज्यादा दिन चल सकी और इंदिरा गांधी के दबाव को न झेल पाने के चलते चरण सिंह ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। चरण सिंह की सरकार गिर गई और लोकसभा चुनाव। यह जनता है जिस जनता की सहानुभूति बटोरकर  समाजवादियों ने केंद्र में सरकार बनाई थी उन्हीं समाजवादियों के खिलाफ जाकर जनता ने इंदिरा गांधी को बहुमत दिया और इंदिरा गांधी ने सरकार बनाई। ऐसी ही गलती राहुल गांधी मामले में मोदी सरकार कर रही है। राहुल गांधी यदि किसी भ्रष्टाचार के मामले में सजायाफ्ता होते तो उनको जनता के बीच जाने में दिक्कत होती पर वह सत्ता का विरोध करते-करते कानून और सत्ता के शिकंजे में आये हैं। वैसे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तानाशाह होने का आरोप लंबे समय से लगाया जा रहा है।

उद्योगपति गौतम अडानी को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ  मोर्चा क्या खोल दिया  कि उनको लोकसभा की सदस्यता तक गंवानी पड़ी। सांसदी जाने के बावजूद राहुल गांधी के तेवर पीएम पर आक्रामक हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि उन पर इन सबका कोई असर नहीं पड़ने वाला है। वह लोकतंत्र के लिए लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे।

उन्होंने सीधा सवाल किया है कि अडानी ग्रुप में जो २० हजार करोड़ रुपये लगाया गया वह किसका है ? जब पत्रकारों ने उनसे सांसदी बचने की उम्मीद के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह उम्मीद की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हंै। वह जनता की आवाज उठाते रहेंगे। इससे उन पर कोई असर नहीं पड़ता कि वह सांसद रहे या नहीं। राहुल गांधी ने कह दिया है कि चाहे वे लोग उन्हें जेल में डाल दें। देखने की बात यह है कि खुद मोदी भी विरोध के चलते ही ऊंचाइयों को छुए हैं।

मारे-पीटे, कुछ भी कर लें वह लोकतंत्र को बचाने के लिए अपनी आवाज उठाते रहंेगे। मोदी के खिलाफ लड़ी जा रही उनकी लड़ाई को अपनी तपस्या बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनकी लड़ाई जारी रहेगी। राहुल गांधी ने राष्ट्रीय मीडिया पर भी उंगली उठाई है। उनका कहना है कि विपक्ष की आवाज मीडिया उठाता है। आज की तारीख में मीडिया विपक्ष को सपोर्ट न कर सत्ता के लिए काम कर रहा है। ऐसे में उनके पास एकमात्र उपाय जनता के बीच जाना है। वैसे क्षेत्रीय दलों में आम आदमी पार्टी, टीएमसी, शिवसेना, सपा और डीएमके भी राहुल गांधी के समर्थन में उतर आये हैं। वैसे भी राहुल गांधी ने नीरव मोदी, ललित मोदी और नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उधर मुख्य न्यायाधीश के डीवाई चंद्रचूड़ के सत्ता को आईना दिखाने वाली पत्रकारिता के बिना स्वस्थ लोकतंत्र नहीं पनप सकता है, वाले बयान ने राहुल गांधी लड़ाई को और बल दे दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता जय रमेश ने ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस राहुल गांधी प्रकरण पर जन आंदोलन छेड़ने जा रही है।