भारत में टैक्स की चर्चा हमेशा से आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी रही है। कभी लोग दुकानदार से पूछते थे “भाई साहब, इतना टैक्स क्यों ले रहे हो?” तो कभी खुद दुकानदार भी उलझन में रहते थे कि किस चीज़ पर कितना टैक्स लगेगा। इसी गड़बड़ी को खत्म करने के लिए 2017 में जीएसटी (GST) लागू हुआ था। अब सरकार इसे और सरल बनाने के मकसद से लेकर आई है GST 2.0।
इस बार सरकार ने साफ़ कर दिया है कि किस सामान या सेवा पर कितना टैक्स लगेगा। अब आम आदमी को कागज़ पलटने या इधर-उधर पूछने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। आइए जानते हैं कि ये नया ढांचा क्या है और हमारी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा।
0% टैक्स स्लैब – रोज़ की ज़रूरतें
राजधानी में सब्ज़ी खरीदने गईं सीमा देवी को सबसे पहले राहत इसी लिस्ट में मिली। उन्होंने कहा, “कम से कम दाल-चावल और सब्ज़ियों पर टैक्स नहीं है, वरना महीने का खर्चा और बढ़ जाता।”
इस स्लैब में शामिल हैं –
- गेहूँ, चावल, दालें
- दूध, अंडे और फल-सब्ज़ियाँ
- नमक
- बच्चों की किताबें और नोटबुक
यानी खाने-पीने और बच्चों की पढ़ाई जैसी बुनियादी ज़रूरतों पर अब भी टैक्स का बोझ नहीं पड़ेगा।
5% टैक्स स्लैब – छोटी-सी चुभन
रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली कुछ चीज़ों पर हल्का टैक्स रखा गया है।
- पैक्ड आटा और ब्रेड
- घरेलू गैस सिलेंडर
- चाय और कॉफी
- रेलवे टिकट (इकोनॉमी क्लास)
दिल्ली के ही एक ऑटो ड्राइवर राजेश का कहना है, “गैस सिलेंडर और चाय-कॉफी पर टैक्स थोड़ा खलता है, लेकिन अगर बाकी चीज़ें सस्ती मिल रही हैं तो ये बर्दाश्त है।”
12% टैक्स स्लैब – जेब पर असर
मिडिल क्लास के लिए यह स्लैब सबसे अहम है।
- मोबाइल फोन
- प्रोसेस्ड फूड
- ₹1000 से ऊपर के कपड़े
- होटल का बिल (₹1000 से ₹2500 तक)
नोएडा की एक कामकाजी महिला अंजलि कहती हैं, “मोबाइल पर टैक्स बढ़ने से जेब पर असर पड़ता है। आजकल फोन तो हर किसी की ज़रूरत है, शौक नहीं।”
18% टैक्स स्लैब – महंगी सुविधाएँ
यह स्लैब उन चीज़ों पर है जिन्हें मिडिल क्लास लोग सुविधा या स्टेटस के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
- इंटरनेट और मोबाइल सेवाएँ
- एयर कंडीशनर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन
- जिम और फिटनेस क्लब
- हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस
- एसी रेस्टोरेंट
यानी अगर आप फिटनेस क्लब जाते हैं या घर में AC इस्तेमाल करते हैं, तो अब खर्चा और बढ़ेगा।
28% टैक्स स्लैब – लग्ज़री और हानिकारक चीज़ें
सरकार ने यहां उन प्रोडक्ट्स को रखा है जिन्हें या तो लग्ज़री माना जाता है या फिर सेहत के लिए नुकसानदायक।
- बड़ी कारें और SUV
- सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला
- याट और प्राइवेट जेट
सरकार का तर्क है कि ऐसे सामान आम जनता के लिए ज़रूरी नहीं, इसलिए इन पर ज्यादा टैक्स लगना चाहिए।
आम लोगों का सवाल
नई लिस्ट से जहां कुछ लोगों को राहत मिली है, वहीं कारोबारियों की चिंता अभी बाकी है। करोल बाग़ के दुकानदार रमेश कहते हैं, “ग्राहकों को अब स्लैब समझाना आसान हो गया है, लेकिन हमें ऑनलाइन रिटर्न भरने में अभी भी दिक्कत आती है।”
सरकार का कहना है कि आगे चलकर रिटर्न फाइलिंग की प्रक्रिया को भी और आसान किया जाएगा।
नतीजा
GST 2.0 आम आदमी को यह सुविधा देता है कि वह आसानी से समझ सके कि किस चीज़ पर कितना टैक्स है। खाने-पीने और ज़रूरी सामान सस्ते रहेंगे, जबकि लग्ज़री आइटम और हानिकारक चीज़ें महंगी होंगी।
आखिरकार यह बदलाव तभी सफल माने जाएंगे जब जनता को लगे कि उनका बजट सुरक्षित है और कारोबारियों को लगे कि सिस्टम सच में सरल हुआ है।
