दिल्ली राजनीतिक संकट की ओर…..

दिल्ली में आम आदमी पार्टी सरकार के कई मंत्रियों और खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप, कई अन्य मंत्रियों के भ्रष्टाचार समेत कई अन्य मामलों में फंसने और लगातार हो रहे इस्तीफे की वजह से राजनीतिक संकट गहराने लगा है। पार्टी के मंत्रियों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं और द्वारा एक के बाद एक इस्तीफे,  खुद की ही पार्टी पर लगाये जा रहे आरोपों से पार्टी बैक फूट पर नजर आ रही है। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन मामले में शुंगलु कमेटी की रिपोर्ट, मनी लांड्रिग को लेकर सीबीआई द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना, सीबीआई छापा और अब ‘आप’ कैबिनेट से बाहर किये गये प्रदेश के पूर्व जलमंत्री कपिल मिश्रा के नये खुलासों से दिल्ली सरकार सकते में है। इस मामले को लेकर जहां दिल्ली सरकार अपने ही पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के आरोपों को बकवास बता रही है, वहीं विरोधी दल भाजपा और कांग्रेस कपिल मिश्रा के खुलासे को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की पुरजोर मांग करने लगे हैं।

दिल्ली कैबिनेट से बाहर किये गये पूर्व जलमंत्री कपिल मिश्रा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया है। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को उन्होंने 5 मई 2017 को  मुख्यमंत्री आवास पर अरविंद केजरीवाल को खुद अपने ही सामने 2 करोड़ रुपये नकदी देते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि इस बाबत जब उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि इतना पैसा कैश में क्यों और कहां से आया तो उन्होंने कोई उपयुक्त जवाब नहीं दिया। जब वे इस मामले की जानकारी एसीबी को देने की बात कही, तो कहा गया कि राजनीति में कुछ बातें ऐसी होती हैं जो बताई नहीं जाती। साथ ही उन्होंने कहा है कि अगर इसमें किसी को शक हो तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और उनका लाई डिटेक्टर टेस्ट कराया जाये।

उन्होंने कहा की आम आदमी पार्टी में कुछ गंदगी आ गई है और उसे बाहर करना है। मुझे पार्टी से कोई नहीं निकाल सकता है और ना ही मैं पार्टी को छोड़ने वाला हूं। इस दौरान उन्होंने अपनी साफ छवि की चर्चा करते हुए कहा कि मंत्री बनने के बाद मैंने एक महीने के भीतर दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के खिलाफ 400 करोड़ रुपये के वाटर टैंकर घोटाले की रिपोर्ट तैयार की। उसके बाद क्या हुआ, ये सबने देखा। उन्होंने कहा कि, ‘मैं कैबिनेट का अकेला ऐसा मंत्री हूं, जिस पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा है। हम गड़बड़ी की शिकायतों के लिए केजरीवाल पर भरोसा करते थे, चाहे वो रिश्तेदारों को पद देना हो, मनी लॉन्ड्रिंग या फंड में गड़बड़ी के आरोप हों, लेकिन उन्होंने भरोसा तोड़ दिया।’

वहीं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कपिल मिश्रा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में जवाब देने की जरुरत नहीं है और कोई इस पर विश्वास नहीं करेगा। पार्टी नेता कुमार विश्वास ने इस मामले को लेकर साथियों-कार्यकर्ताओं से धैर्य रखने और विश्वास बनाएं रखने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि देश और कार्यकर्ताओं के हित में जो बेहतर होगा, वह हम सब मिलकर करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के आरोप लगाना गलत है। अरविंद को एक दशक से ज्यादा से जानता हूं। इतने साल साथ काम करने के बाद कह सकता हूं कि वो भ्रष्टाचार करेंगे, ये सोच भी नहीं सकता। पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने कपिल मिश्रा के आरोपों और विपक्षियों द्वारा केजरीवाल से इस्तीफे की मांग पर कहा कि बीजेपी और कांग्रेस नैतिकता का पाठ न पढ़ाए। साथ ही उन्होंने कहा कि कपिल मिश्रा के पीछे बीजेपी का हाथ है और वह उन्हीं की भाषा बोल रहे हैं। पूरी पार्टी केजरीवाल के साथ है और वह इस्तीफा नहीं देंगे। साथ ही संजय सिंह ने कहा कि मंत्री पद से हटाए जाने के बाद कपिल की बौखलाहट और बीजेपी की साजिश सामने आ गई है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी घबराने वाली नहीं है और केजरीवाल की लीडरशिप में पार्टी एकजुट हैं। बीजेपी दिल्ली सरकार का गला घोंटने की कोशिश कर रही है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि बीजेपी देशभर में विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।

कपिल मिश्रा के खुलासे के बाद आम आदमी पार्टी सरकार और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। कांग्रेस, बीजेपी समेत कई पार्टियों ने दिल्ली की ‘आप’ सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन और मुख्यमंत्री  अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधने लगे हैं। वहीं पार्टियों द्वारा मुख्यमंत्री केजरीवाल की इस्तीफे की भी मांग उठने लगी है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि कपिल मिश्रा ने देर से ही सही लेकिन, उन्होंने जो हिम्मत दिखाई है इसके लिए उन्हें धन्यवाद। साथ ही तिवारी ने कहा कि कपिल का एक चश्मदीद के रुप में एलजी के सामने गवाही देना, कानून में बहुत मायने रखती है। उन्होंने कहा कि अब केजरीवाल के पास सीएम की कुर्सी पर बैठने का नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं सांसद महेश गिरी ने कहा कि केजरीवाल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं।  दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा कि केजरीवाल सरकार पर उनकी पार्टी के ही पूर्व जलमंत्री ने जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उसे खारिज नहीं किया जा सकता है। साथ ही इस अवसर पर माकन ने ऐलान करते हुए कहा कि पार्टी सिग्नेचर कैंपेन शुरु करेगी और 10 लाख सिग्नेचर इक्ट्ठा कर केजरीवाल को सौंप कर इस्तीफे की मांग करेंगे। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने केजरीवाल से इस्तीफे की मांग करते हुए इस मामले की जांच कराने की मांग की है। कांग्रेसी नेत्री शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और केजरीवाल से इस मामले में जवाब देने की मांग की है। हालांकि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सफाई देने की मांग की है। साथ ही जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि कुछ लोग बीजेपी से साठगांठ कर केजरीवाल को बदनाम करने कि कोशिश कर रहे हैं। त्यागी ने केजरीवाल का पक्ष लेते हुए सवाल उठाया कि क्या देश में अकेली यह भ्रष्ट सरकार है। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने अरविंद केजरीवाल पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पर दुःख जताया है।

गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम चुनाव के दौरान बीजेपी के एक नेता ने प्रदेश में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने की संभावना व्यक्त किया था। चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक ऋतुराज का गैर कानूनी लोगों से मिलीभगत, पार्टी नेता कुमार विश्वास पर बयानबाजी को लेकर विधायक अमानतुल्लाह खान को पार्टी से बाहर निकालना और अब पूर्व जलमंत्री कपिल मिश्रा का खुलासा पार्टी के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। राजनीतिक दल इस मुद्दे को भुनाने में लगे हैं और केजरीवाल से इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। ऐसे में देखना यह होगा कि दिल्ली की आप सरकार में लगातार चल रही उठा-पटक, बयानबाजी, भष्टाचार, इस्तीफा आदि क्या गुल खिलाती है और प्रदेश में राजनीतिक स्थिरता कब तक कायम रहती है? साथ ही यह भी देखने की बात होगी की आम आदमी पार्टी सरकार पार्टी और संगठन की मजबूती के लिए क्या-क्या कदम उठाती है?

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