किसान संगठनों का 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान

नई दिल्ली। किसान संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने और व्यापक रूप देने के लिए 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है। इस दौरान देशभर में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन होंगे। पंजाब, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश और अन्‍य राज्‍यों के किसान संगठनों की बैठक में भारत बंद को पर स‍हमति बनी। किसानों को लगता नहीं कि सरकार के साथ जारी बातचीत का कोई सकारात्मक नतीजा निकलेगा। इसे लेकर किसान संगठनों को शक है।
किसान संगठनों ने एकमत से यह निर्णय किया है कि उनके प्रतिनिधि सरकार से नए कानूनों को रद्द करने के लिए कहेंगे। इससे कम पर बात नहीं बनेगी। भारतीय किसान यूनियन ने दिल्‍ली के और बॉर्डर पॉइंट्स ब्‍लॉक करने की चेतावनी दी है।

चक्‍का जाम की तैयारी

8 दिसंबर को भारत बंद वाले दिन देशभर में चक्‍का जाम की तैयारी है। रेल सेवाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश होगी। कृषि आधारित इलाकों में बंद का व्‍यापक असर देखने को मिल सकता है। बाजार से लेकर सामान्‍य जन जीवन पर बुरा असर पड़ने की पूरी संभावना है। सड़कें जाम होने से सप्‍लाई चेन्‍स और ट्रांसपोर्ट सर्विस‍िज की कमर टूट सकती है। अगर राजनीतिक दल भी भारत बंद के समर्थन में उतरते हैं तो फिर उसके असर का दायरा और बढ़ सकता है। इमर्जेंसी और जरूरी सेवाओं को बंद से दूर रखने की बात किसान संगठन कह चुके हैं।

सरकार थोड़ी नरम

हजारों किसान तीन नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर सड़क पर हैं। दिल्‍ली से लगने वाली सीमाएं ब्‍लॉक कर दी गई हैं। केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच आज अगले दौर की बातचीत होनी है। किसान कानून वापस लेने से कुछ भी कम स्‍वीकारने को तैयार नहीं हैं।
उधर सरकार थोड़ी नरम दिख रही है लेकिन पूरी तरह रोलबैक का फैसला उसके लिए शर्मिंदगी भरा होगा। अधिकारी किसान संगठनों की मुख्‍य आपत्तियों को लेकर माथापच्‍ची कर रहे हैं कि बीच का कोई रास्‍ता निकल आए। मगर किसान संगठनों को इसकी उम्‍मीद कम ही लग रही है और ऐसे में वह भारत बंद बुलाकर सरकार पर दबाव और बढ़ाना चाहते हैं।

400 से ज्‍यादा किसान संगठन

देशभर के किसान संगठनों की ऑल इंडिया किसान संघर्ष को ऑर्डिनेशन कमिटी ने भी भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। इस संस्‍था के तहत देशभर के 400 से ज्‍यादा किसान संगठन आते हैं। यानी सरकार को यह साफ इशारा कर दिया गया है कि किसान आंदोलन राष्‍ट्रव्‍यापी होने जा रहा है और आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा ही।

विपक्षी पार्टियों का समर्थन

तृणमूल कांग्रेस, राष्‍ट्रीय लोकदल जैसी पार्टियों ने खुलकर आंदोलन का समर्थन किया है तो बाकी विपक्षी दल भी सरकार को घेरे हुए हैं। कुछ राजनीतिक दल भारत बंद को भी अपना समर्थन दे सकते हैं। नये कृषि काननू को लेकर केंद्रीय मंत्रियों के साथ किसान नेताओं की चौथी बैठक 3 दिसंबर को हुई थी। शनिवार को पांचवें दौर की बातचीत होनी है।

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